कोरोना के संकट को देखते हुए पंजाब की जेलों से भीड़ कम करने के उद्देश्य से करीब 6000 कैदियों को पैरोल और अंतरिम जमानत के फैसले के बाद जुवेनाइल कैदियों को भी लीव आफ ऐबसेंस देने का फैसला किया गया है। कैबिनेट मंत्री अरुणा चौधरी ने बताया कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की जुवेनाईल जस्टिस मानीटरिंग कमेटी ने उन सजायाफ्ता और दोषी बच्चों को 21 दिनों तक छुट्टी (लीव ऑफ ऐबसैंस) देने की हिदायतें जारी की है, जिन्होंने संगीन अपराध नहीं किए हैं।
इसका पालना करते हुए पंजाब के संबंधित जिलों के जुवेनाईल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी), बाल सुधार घर और विशेष घरों में रखे गए उन बच्चों की रिहाई के लिए काम कर रहे हैं, जो इस शर्त के मुताबिक योग्य हैं। उल्लेखनीय है कि पंजाब में लड़कों के लिए लुधियाना, फरीदकोट और होशियारपुर में तीन और जालंधर में लड़कियों के लिए एक बाल सुधार घर है। होशियारपुर में लड़कों के लिए एक विशेष घर और सुरक्षा की एक जगह मौजूद है। कुल 300 की क्षमता वाले इन स्थानों में कुल 174 बच्चे मौजूद हैं।
कैबिनेट मंत्री अरुणा चौधरी ने आगे बताया कि सभी बाल घरों और वृद्ध आश्रमों के निवासियों को वायरस को फैलने को रोकने के उपायों के प्रति जागरूक किया गया है। पंजाब सरकार ने कोविड-19 के संकट के मद्देनजर राज्य के सभी लाभपात्रियों जिनमें 6 माह से 6 साल तक की उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और माताओं को पौष्टिक आहार सप्लाई करने की प्रक्रिया शुरू की है। यह सप्लाई आंगनवाड़ी वर्करों द्वारा लाभपात्रियों के घर-घर जाकर की जाएगी।
यह जानकारी देते हुए सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री अरुणा चौधरी ने बताया कि लोगों की परेशानियों को दूर करने के उद्देश्य से बाल विकास और प्रोजैक्ट अफसरों की निगरानी में पौष्टिक आहार का वितरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग जरूरतमंद लोगों को हरसंभव सहायता प्रदान करने के लिए सभी जिलों के प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि 24.69 लाख लाभपात्री बुजुर्गों, दिव्यांग व्यक्तियों, विधवाओं, बेसहारा -महिलाओं और आश्रित बच्चों के बचत खातों में पैंशनें डालने का काम पूरा हो चुका है।
उन्होंने कहा कि मार्च महीने के लिए पैंशनों का वितरण, जिसकी कुल राशि 185.23 करोड़ रुपए बनती है, अप्रैल के पहले सप्ताह से शुरू कर दी जाएगी।