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जज साहब करते हैं शोषण, या तो न्याय दिलाएं या दे दें खुदकुशी की अनुमति

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चंडीगढ़। मानसा की अदालत में तैनात कर्मचारी सोमवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नाम पत्र लेकर हाईकोर्ट पहुंचा। पत्र में उसने लिखा कि जज कर्मचारियों को परेशान करते हैं और अपने घर का काम करवाते हैं। उसने कहा कि या तो उसे इंसाफ दिया जाए या फिर आत्महत्या की अनुमति।
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हरमीत सिंह ने मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र में कहा कि कोर्ट परिसर में जिन कर्मचारियों की नियुक्ति है उन्हें जज परेशान करते हैं। जजों को घर पर काम के लिए अलग से कर्मचारी मिलते हैं फिर भी कोर्ट में मौजूद कर्मियों को घर के काम में लगा दिया जाता है। उसने कहा कि कोर्ट के कर्मचारियों को लेकर हाईकोर्ट समय-समय पर दिशानिर्देश भी जारी करता है लेकिन निचली अदालतों में आदेश का पालन नहीं होता है। जजों के खिलाफ अक्सर कोई आवाज उठाने की हिम्मत नहीं जुटा पाता है। जो व्यक्ति आवाज उठाता है उसका या तो तबादला कर दिया जाता है या फिर उसके खिलाफ विभागीय जांच बैठा दी जाती है।
हरमीत सिंह ने कहा कि वह आवाज उठाने का परिणाम भुगत रहा है। सबसे पहले उसका तबादला लुधियाना से मानसा कर दिया गया। इसके बाद उसके खिलाफ विभागीय जांच बैठा गई और सर्विस बुक में रेड एंट्री कर दी गई। उसके खिलाफ दस्तावेजों को गायब करने के आरोप में मामला भी दर्ज करवाया गया। 8 वर्ष की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद हाईकोर्ट ने उसे निर्दोष पाया। अभी भी उसके खिलाफ विभागीय जांच जारी है। हरमीत ने मुख्य न्यायाधीश से कहा कि या तो उसे इंसाफ दिया जाए या फिर आत्महत्या की अनुमति।
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गौरतलब है कि बीते दिनों हरियाणा में एक जज के गनमैन ने परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी।
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