चंडीगढ़ नगर निगम जेपी प्लांट के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में जाने की सोच रहा है जबकि जेपी प्लांट के अफसर निगम के खिलाफ एनजीटी चले गए हैं। जेपी के अफसरों का आरोप है कि एनजीटी के निर्देश के बावजूद नगर निगम गीला व सूखा कचरा अलग-अलग करके नहीं दे रहा। इससे कचरा प्रोसेस करने में काफी समस्या हो रही है। इस मामले में एनजीटी की ओर से निगम को एक माह में जवाब देने के लिए कहा गया है।
नगर निगम कमिश्नर केके यादव के निर्देश पर पूरे शहर का लगभग साढ़े तीन सौ टन कचरा जेपी प्लांट को दिया जा रहा है। कमिश्नर का कहना है 30 सितंबर तक एनजीटी की ओर से गीला व सूखा कचरा अलग-अलग करके देने के लिए कहा गया था, जिसे पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जेपी प्लांट जो कि डंपिंग ग्राउंड पर कचरा फेंक रहा है, वह गलत है।
कॉन्ट्रेक्ट के अनुसार, पूरा कचरा जेपी प्लांट को लेना होगा इसलिए यह जेपी प्लांट की समस्या है कि कचरा कैसे प्रोसेस करेगा, लेकिन अब डंपिंग ग्राउंड में कचरा नहीं डाला जाएगा। हालांकि नगर निगम भी जेपी प्लांट के खिलाफ एनजीटी में जाने की तैयारी में है। कमिश्नर का कहना है कि जेपी प्लांट अभी भी पूरी तरह से न कचरा प्रोसेस नहीं कर रहा है। क्योंकि प्लांट के अंदर कचरे के ढेर लगे हैं। कुछ दिन पूर्व कचरा दीवार तोड़कर फोरेस्ट एरिया में गिर गया है। इससे भी काफी समस्या हो रही है इसलिए कोशिश कर रहे हैं कि जल्द से जल्द सूखा व गीला अलग-अलग कर के दिया जाए।
10 गांवों में गीला व सूखा कचरा अलग अलग ले रहे
नगर निगम के सब डिवीजनल इंजीनियर अमित शर्मा ने बताया कि अब तक नगर निगम में शामिल 13 गावों में से 10 गांवों में गीला व सूखा कचरा अलग-अलग ले रहा है। जल्द ही तीन अन्य गावों में भी यह व्यवस्था लागू की जाएगी। उसके बाद शहर के प्रमुख मार्केट जैसे सेक्टर 22, 17, 15, 23, 10, 11 में भी यह व्यवस्था लागू कर देंगे। बताया कि स्वच्छता अभियान में इसके भी नंबर होते हैं।
एनजीटी ने बनाई सात सदस्यीय टीम, एक माह में देनी होगी रिपोर्ट
जेपी प्लांट ने जैसे ही एनजीटी में नगर निगम से आ रही समस्याओं के बारे में बताया तो एनजीटी ने सात लोगों की एक टीम बनाई है, जिसमें पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारी शामिल हैं। टीम प्लांट पर आने वाले कचरे की जांच करेगी। उसके बाद एक माह में एनजीटी को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। उसके बाद एनजीटी मामले में आगे कोई निर्णय लेगी।
सेग्रीगेट कचरा दें तो 500 नहीं 600 टन कचरा प्रोसेस कर दें : जेपी
जेपी कंपनी के सीनियर मैनेजर एनके बोहरा ने बताया कि निगम को कई बार कहने के बावजूद गीला और सूखा कचरा अलग नहीं मिल रहा। कुछ दिन पहले किसी उखड़ी हुई सड़क का सॉलिड वेस्ट प्लांट में आ गया। इससे मशीन में कचरे को काटने वाले 12 दांत टूट गए। एक दांत 2 लाख रुपये का आता है और जर्मनी से मंगवाया जाता है। इससे काफी नुकसान हो रहा है। वहीं हार्टिकल्चर वेस्ट भी निगम हमें दे रहा है। यदि नगर निगम हमें गीला और सूखा कचरा अलग-अलग दे तो हम 500 नहीं 600 टन कचरा प्रतिदिन प्रोसेस करना शुरू कर दें।
नगर निगम चाहता है कि हम प्रतिदिन 500 टन कचरा प्रोसेस करें। यदि सूखा और गीला कचरा अलग-अलग नहीं मिलेगा तो यह संभव नहीं क्योंकि दुनिया में कोई ऐसी मशीन नहीं जो मिक्स कचरा प्रोसेस कर सके।
- एनके वोहरा, सीनियर मैनेजर, जेपी प्लांट
एनजीटी की ओर से एक माह में जवाब देने को कहा गया है। हम तैयार हैं। ज्यादातर गांवों से गीला व सूखा कचरा अलग-अलग लेने लगे हैं। जल्द शहर के अन्य क्षेत्रों से भी लेने लगेंगे। रही बात कचरा देने की तो कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार प्लांट को इतना कचरा लेना ही है।
- केके यादव, कमिश्नर, नगर निगम