पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान।
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पंजाब के सरकारी मुलाजिम इन दिनों उलझन में हैं। सरकार द्वारा घोषित किए गए दिवाली के दो तोहफों में से एक, 6 फीसदी डीए तो उन्हें मिल गया है लेकिन पुरानी पेंशन बहाली का दूसरा तोहफा अभी तक अटका है। सरकार ने 20 दिन बीत जाने के बाद भी इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है। उधर, कच्चे मुलाजिमों को 58 साल की उम्र तक नौकरी में बनाए रखने के लिए सरकार ने पंजाब सर्विस रूल के तहत जिस ‘स्पेशल कैडर’ के गठन का एलान किया था, उसकी फाइल राज्यपाल ने अब तक नहीं लौटाई है। हालांकि सरकार की तरफ से इस ग्रुप में कच्चे मुलाजिमों को शामिल करने के लिए आवेदन प्रक्रिया संबंधी वेबसाइट चालू कर दी है।
पुरानी पेंशन बहाली संबंधी नोटिफिकेशन लागू करने की मांग को लेकर कई कर्मचारी संगठनों ने सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। फिलहाल सरकार से जल्द नोटिफिकेशन जारी करने की मांग की गई है लेकिन अगर इसमें देरी होती है तो कर्मचारी संगठन सड़कों पर उतरने की तैयारी भी कर रहे हैं। बुधवार को पंजाब सिविल सचिवालय के कर्मचारियों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने एक रैली का आयोजन कर सरकार को चेतावनी दी।
गौरतलब है कि राज्य सरकार पुरानी पेंशन बहाली के कारण हर महीने पड़ने वाले वित्तीय बोझ के आकलन के साथ ही इस मामले में कानूनी पहलुओं पर राय ले रही है, ताकि पुरानी पेंशन बहाली का फैसला कानूनी अड़चनों में न उलझे।
दूसरी ओर, राज्य सरकार ने 36000 कच्चे मुलाजिमों को पक्का करने की अपनी योजना के तहत गत 7 अक्तूबर को 8736 टीचरों के लिए नोटिफिकेशन जारी किया था। इसके बाद अन्य विभागों के लिए कच्चे मुलाजिमों के जिस ‘स्पेशल कैडर’ का गठन किया जाना है, उससे संबंधित नोटिफिकेशन अब तक राज्यपाल की मंजूरी के लिए राजभवन में अटका है। चूंकि इस कैडर का गठन, भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची-2 की एंट्री 41 के साथ पढ़ी गई धारा 162 के तहत ‘कल्याणकारी राज्य’ के अधिकार क्षेत्र के रूप में किया गया है। इस कैडर पर पंजाब सर्विस रूल के कुछ नियम प्रभावी होंगे लेकिन राज्यपाल की मंजूरी के बिना सरकार के लिए इस मामले में आगे बढ़ना कठिनाई पैदा कर सकता है।