चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रधान सुनील जाखड़ ने आखिरकार पार्टी से नाता तोड़ लिया। हाईकमान द्वारा उन्हें सभी पदों से हटाने का नोटिस भेजे जाने के बाद उन्होंने न तो नोटिस का जवाब ही दिया और न ही कोई प्रतिक्रिया दी थी लेकिन पार्टी के प्रति उनके तेवरों से यह अनुमान लगाया जा रहा था कि वह कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं।
शनिवार को अपने फेसबुक पेज पर ऑनलाइन होकर उन्होंने कांग्रेस को अलविदा कहा और इसके साथ ही पार्टी की खराब हालत के लिए अंबिका सोनी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और हरीश रावत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। जाखड़ ने अंबिका सोनी का उल्लेख करते हुए सोनिया गांधी को उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की, वहीं सोनिया गांधी द्वारा उन्हें विभिन्न पदों से हटाए जाने का नोटिस भेजे जाने पर यह कहते हुए सवाल खड़ा किया कि उनके पास तो कोई पद था ही नहीं। जाखड़ ने राहुल गांधी पर सवाल उठाए कि वह चापलूसों से घिरे हुए हैं और सही फैसले नहीं ले पा रहे। हरीश रावत द्वारा पंजाब कांग्रेस के भीतरी विवादों में निभाई गई भूमिका पर भी जाखड़ ने सवाल उठाए।
अंबिका सोनी को निशाने पर लेते हुए जाखड़ ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के पार्टी छोड़ने के बाद सोनी के बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने यहां तक कहा कि हैरानी की बात है कि मेरे खिलाफ नोटिस जारी करवाने में जिसने अहम भूमिका निभाई, वह आज पार्टी अध्यक्ष की आंखों का तारा है और यही नेता 1977 में इंदिरा गांधी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया करती थीं। उन्होंने कहा कि दुख इस बात का है कि दिल्ली में बैठे नेता जिन्हें पंजाब के कल्चर के बारे में कुछ पता ही नहीं है, उन्होंने सिख कौम को यह कहकर अपमानित किया कि अगर पंजाब में कोई हिंदू मुख्यमंत्री बना तो आग लग जाएगी। यह पंजाब का अपमान है। जाखड़ ने कहा कि पंजाब विधानसभा चुनाव अपने आप में बहुत कुछ कह रहे हैं। सिखों ने अकाली दल को वोट नहीं डाली, हिंदुओं ने भाजपा को वोट नहीं डाली, दलितों ने कांग्रेस को वोट नहीं डाली, वोट पड़ी तो बदलाव को। कांग्रेस को इस पर चिंतन करना चाहिए।
क्या नेताओं को आपस में लड़ाना चाहती है कांग्रेस
जाखड़ ने कहा कि वह इस बात से हैरान हैं कि उन्हें प्रदेश प्रधान के पद से यह कहकर हटाया गया कि उनकी कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ काफी निकटता है। इसके बाद, दूसरा प्रधान यह कहकर लगाया गया कि उनकी कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ नहीं बनती है। इसके बाद कैप्टन को हटाया गया और एससी वर्ग से मुख्यमंत्री बनाया गया। जाखड़ ने सवाल किया कि आखिर कांग्रेस चाहती क्या है? क्या वह नेताओं को आपस में लड़ाना चाहती है या उसने सोचने समझने की शक्ति को आउट सोर्स कर रखा है?
पंजाब में हिंदू, सिख के बीच जहर का बीज बोया
जाखड़ ने अंबिका सोनी को लेकर पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ‘मेरा सोनिया गांधी से निवेदन है कि राजनीति पूरे देश में करिए, पंजाब को बख्श दीजिए। पंजाब ने बहुत बुरे दिन देखे हैं। पंजाब को धर्म के आधार पर नहीं देख सकते। पंजाब एक है। पूरे देश में हिंदू, मुस्लिम, सिख ईसाई में सबसे अधिक भाईचारा पंजाब में ही है। अंबिका सोनी की जुबान ने कांग्रेस का बेड़ा गर्क किया। सिख, सिखी और कांग्रेस के माथे पर अंबिका सोनी ने कलंक लगाया और हिंदुओं को बदनाम किया। जाखड़ ने कहा कि अंबिका सोनी ने ही हाईकमान से कहा था कि हिंदू को सीएम बनाया गया तो पंजाब के लिए उचित नहीं होगा।
रावत को क्या सोचकर प्रभारी बनाया : जाखड़
हरीश रावत की पंजाब में भूमिका पर सवाल उठाते हुए जाखड़ ने कहा कि कोई बताएगा कि रावत को क्या सोचकर पंजाब का प्रभारी बनाकर भेजा था? उन्होंने कहा कि पार्टी को किसने सलाह दी कि रावत के जरिये पार्टी उत्तराखंड और पंजाब में अच्छा प्रदर्शन करेगी? उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के सीएम प्रत्याशी हरीश रावत का एक पैर पंजाब में और दूसरा देहरादून में रहा, नतीजा सबके सामने है। रावत ने पंजाब कांग्रेस के अंदरूनी कलह को हवा दी और उत्तराखंड में उन्हें इसकी सजा मिली। जाखड़ ने कहा कि रावत की पंजाब में यही मंशा रही कि हम तो डूबे हैं सनम और तुमको भी ले डूबेंगे।