पंचकूला। नार्थ इंडिया के निवेशक वियतनाम आएं और वहां निवेश करें। वियतनाम में व्यापार की अपार संभावनाएं हैं। यह न्योता वियतनाम के राजदूत फाम सान छाउ ने दिया है। व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए भारत में वियतनाम के राजदूत फाम सान छाउ वीरवार को पंचकूला के एक होटल में पहुंचे थे।
एसोचैम द्वारा आयोजित ‘इंडिया-वियतनाम बिजनेस फोरम’ के दौरान उद्यमियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उनका देश उत्तरी भारत के निवेशकों को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) और आर्थिक साझेदारी के साथ कई फायदे प्रदान करवाने के लिए वचनबद्ध है। उन्होंने वियतनाम के चंडीगढ़ स्थित मानद कांसेलेट जनरल दविंद्र सिंह थापर की मेजबानी में इस क्षेत्र के स्थानीय उद्यमियों को अपने देश में निवेश के विकल्प तलाशने के रास्ते बताए। वह वियतनाम को एक आदर्श पर्यटन स्थल प्रोजेक्ट करने की दिशा में चंडीगढ़ ट्राइसिटी के तीन दिवसीय दौरे पर हैं।
उन्होंने बताया कि वियतनाम और भारत का व्यापार कुछ वर्षों में काफी ज्यादा बढ़ चुका है। यह दोनों देशों के बीच परस्पर आपसी विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि वियतनाम में आकर्षक निवेश नीतियां, कई एफटीए समझौते और सीधी उड़ानों की शुरुआत, तेजी से आर्थिक विकास की दर, राजनीतिक स्थिरता, सस्ते लेबर और देश अनुकूल व्यापारिक वातावरण के साथ कई ऐसे पहलू हैं, जिसे देखकर भारतीय निवेशक वहां आ सकते हैं। वियतनामी दूतावास के ट्रेड काउंसलर बुई द्रुंग थुओंग ने बताया कि वियतनाम के साथ व्यापारिक संभावनाएं धीरे-धीरे बढ़ती चली जा रही हैं। भारत के लिए वियतनाम विश्व का 17वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है जबकि आसियान देशों की दृष्टि से सिंगापुर, इंडोनेशिया और मलेशिया के बाद चौथा सबसे व्यापारिक भागीदार है। वहीं दूसरी तरफ वियतनाम भी भारत के लिए विश्व में दसवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार के रुप में उभरा है।
उन्होंने बताया कि वियतनाम की विदेशी निवेश के आंकड़ों के अनुसार भारत के करीब 65 अरब से ज्यादा के व्यापक निवेश के साथ 294 परियोजनाएं वियतनाम के लिए निर्धारित की गई हैं। इसमें वियतनाम, भारत के लिए 26वां सबसे बड़ा निवेशक देश है। भारत के लिए निवेश के प्रमुख क्षेत्र ऊर्जा, खनिज, कृषि प्रसंस्करण, चीनी, चाय, कॉफी, एग्रो केमिकल्स, आईटी और आटो उपकरण शामिल हैं। वियतनाम ने भी भारत में दो अरब के अनुमानित निवेश के साथ छह परियोजनाओं को अंजाम दिया है जो कि फार्मा, आईटी और निर्माण सामग्री के क्षेत्र में प्राथमिक हैं। इस कार्यक्रम में मौजूद चंडीगढ़ में वियतनाम के कॉनसोलेट जनरल दविंदर सिंह थापर ने उत्तर भारतीय प्रतिभा की उपयोगिता पर बल देकर कहा कि भारत में वैज्ञानिकों और इंजीनियरों का एक बहुत बड़ा पूल है। इस मौके पर एसोचैम हिमाचल स्टेट कौंसिल के चेयरमैन जितेंद्र सोढी ने दोनों देशों के बीच बिजनेस फोरम की महत्ता पर बल दिया और कहा कि संयुक्त प्रयास व्यापार और वाणिज्य को गति देंगे।
उत्तरी भारत में हैं व्यापारी
वियतनाम के राजदूत फाम सान छाऊ ने अमर उजाला के साथ खास बातचीत में कहा कि उन्होंने देखा है कि उत्तरी भारत में ज्यादातर व्यापारी हैं जबकि साउथ में ऐसा नहीं है। वहां नौकरीपेशा ज्यादा हैं। उन्होंने कहा कि इसी वजह से उत्तरी भारत वियतनाम का मुख्य केंद्र है। उन्होेंने बताया कि प्रतिवर्ष उत्तरी भारत से एक लाख लोग वियतनाम जाते हैं। जबकि पूरे भारत से 1.3 लाख लोग वियतनाम जाते हैं। उन्होंने कहा कि वियतनाम में निवेशी करने के लाभ हैं कि वहां ज्यादा लाभ हैं और ट्रेड के अनुसार छूट भी।
वियतनाम भी कर सकता है निवेश
द एसोसिएट चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया के पंजाब स्टेट काउंसिल और रीजनल कमेटी एमएसएमई के चेयरमैन कुलविन शीरा ने बताया कि पंजाब में विकास की काफी ज्यादा संभावनाएं हैं। वियतनाम के साथ की गई इस बातचीत के दौरान कई बात सामने आई हैं। इसमें दोनों देशों के लिए ही अपार संभावनाएं हैं। कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं जिसमें वियतनाम भी पंजाब में निवेश कर सकता है। इसके साथ ही पंजाब भी वियतनाम में निवेश कर सकता है।