अदालत ने स्टे देने से किया मना, निचली अदालत का आदेश बरकरार अपील खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने करोड़ों रुपये के पारिवारिक संपत्ति विवाद में अंतरिम राहत (स्टे) देने से इनकार करते हुए वादी की अपील खारिज कर दी। अदालत ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि इस स्तर पर राहत देने का पर्याप्त आधार नहीं बनता।
मामला सिद्धार्थ सिंह बनाम बलविंदर कौर एवं अन्य के बीच संपत्ति विवाद से जुड़ा है। वादी ने अपील में मांग की थी कि विवादित संपत्तियों को बेचने या किसी तीसरे पक्ष को हस्तांतरित करने पर रोक लगाई जाए, जिसे निचली अदालत पहले ही खारिज कर चुकी थी।
क्या है मामला
वादी सिद्धार्थ सिंह का दावा है कि चंडीगढ़, दिल्ली और मोहाली सहित कई स्थानों पर स्थित संपत्तियां उसके पिता और दादा की संयुक्त कमाई से खरीदी गई थीं, जिन पर उसका जन्मसिद्ध अधिकार है। उन्होंने वर्ष 2005 की एक कथित वसीयत को जाली बताते हुए आरोप लगाया कि इसी के आधार पर संपत्तियां गलत तरीके से प्रतिवादी के नाम करवाई गईं।
वहीं, प्रतिवादी पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संपत्तियां वैध तरीके से खरीदी और हस्तांतरित की गई हैं। उन्होंने यह भी दलील दी कि वादी खुद को वैध उत्तराधिकारी साबित नहीं कर पाया है और मामला समयसीमा से बाहर है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। हालांकि, मामले की मुख्य सुनवाई जारी रहेगी, जिसमें संपत्ति के अधिकार, वसीयत की वैधता और उत्तराधिकार के दावे पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।