पंचकूला। एचएमटी पिंजौर यूनिट का पुनर्गठन कर उसको किसी पब्लिक सेक्टर यूनिट के साथ मर्ज कर या वहां डिफेंस आर्म्स फैक्ट्री के साथ रेलवे कोच फैक्ट्री लगाने की मांग की गई है। पीएम को भेजे ज्ञापन में कहा गया है कि बंद एचएमटी ट्रैक्टर प्लांट में 55 प्रकार की 550 मशीनें मौजूद हैं जिनकी कीमत करोड़ों में है। प्लांट और मशीनरी के बेहतर उपयोग, युवाओं के लिए रोजगार के साधन उपलब्ध कराने और औद्योगिक रूप से पिछड़े क्षेत्र को समृद्ध करने के लिए नीति और योजना बनाना अति आवश्यक है। एचएमटी बचाओ संघर्ष समिति के संरक्षक एवं पूर्व चेयरमैन एडवोकेट विजय बंसल ने पीएम नरेंद्र मोदी को क्षेत्र के विकास के लिए ज्ञापन के माध्यम से सुझाव भी दिया है।
शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष विजय बंसल का कहना है कि 27 अक्तूबर 2016 को एचएमटी ट्रैक्टर प्लांट को भाजपा की केंद्र सरकार ने बिना किसी भविष्य की योजना के बंद कर दिया। इससे हजारों कर्मचारी बेरोजगार हो गए। सैकड़ों लघु उद्योगों पर ताले लग गए। अब विशेषज्ञों से सलाह कर बनाई योजना को अमल में लाने से प्रदेश के हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा। पीएम के दिशा निर्देश में टेक्नोक्रेट्स अध्ययन करे तो सकारात्मक परिणाम आ सकते हैं।
डिफेंस उपकरण बनाने के काम आ सकता है प्लांट
भारतीय सेना की वेस्टर्न कमांड एचएमटी पिंजौर के बिल्कुल नजदीक है। ऐसे में बंद पड़ा ट्रैक्टर प्लांट भारतीय सेना के डिफेंस उपकरण बनाने के काम आ सकता है। 20 साल पूर्व नजदीक की ही सूरजपुर में स्थित एसीसी फैक्ट्री को भी इसी प्रकार बंद किया गया था, जिसका उपयोग औद्योगिक पर्पज के लिए होना था। अभी तक मामला विवादित है। मशीनरी और जमीन बेकार हो रही है।
टैक्स में छूट देकर स्पेशल इंडस्ट्रियल जोन घोषित करे सरकार
विजय बंसल का कहना है कि इलाके की भौगोलिक स्थिति हिमाचल के बद्दी, परवाणू और उत्तराखंड के भांति है। शिवालिक क्षेत्र होने के कारण औद्योगिक रूप से काफी पिछड़ा है। एचएमटी-एसीसी की खाली पड़ी जमीनों को उपयोग में लाकर इंडस्ट्रियल हब भी बनाया जा सकता है।
स्किल इंडिया डेवलपमेंट के लिए भी बेहतर उपयोग
एचएमटी के पास कन्वेंशनल, स्पेशल पर्पज व सीएनसी मशीनों का एक बेहतरीन सेटअप है। इसके साथ ही कार्यरत ट्रेनिंग सेंटर है। एचएमटी ट्रेनिंग सेंटर में प्रति वर्ष सैकड़ों नौजवान और सेवानिवृत्त जवान ट्रेनिंग लेकर स्वरोजगार और अन्य रोजगार के अवसर पैदा करते हैं। स्किल डेवलपमेंट के अंतर्गत आईआईटी एवं तकनीकी विश्वविद्यालय का दर्जा दिया जा सकता है।
कैसे हुआ है एचएमटी की 846 एकड़ जमीन का बंटवारा
एचएमटी के पास 1962 से कुल 846 एकड़ जमीन थी। इसमें से अब 400 एकड़ जमीन एचएमटी ट्रैक्टर और मशीन प्लांट के पास है। जिसमें कॉलोनी, स्कूल, मार्केट आदि विकसित हैं। 446 एकड़ जमीन का कब्जा हरियाणा सरकार के एचएसआईआईडीसी के पास है। इसमें 80 एकड़ फ्लॉप एप्पल मंडी के लिए मंडी बोर्ड के पास है। 33 एकड़ जमीन रेलवे, 18 एकड़ एनएचआई और कौशल्या डैम द्वारा जमीन अधिकृत है।