एक साल बीतने के बावजूद ट्रायल शुरू न होने पर कोर्ट ने दी जमानत
सह आरोपियों को पहले ही मिल चुका है जमानत का लाभ
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा है कि यदि ट्रायल में असामान्य देरी हो और आरोपी एक वर्ष से अधिक समय से जेल में बंद हो तो ऐसे में जमानत से इन्कार नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब मामला नशीला पदार्थ के वाणिज्यिक मात्रा से कम का हो और सह आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी हो तो अदालतों को ऐसी स्थिति में उदारता दिखानी चाहिए।
जस्टिस संजय वशिष्ठ ने रिंकू थापर और दिव्यम की दूसरी जमानत याचिकाओं को स्वीकार करते हुए उन्हें नियमित जमानत प्रदान की। दोनों को एनडीपीएस एक्ट, आर्म्स एक्ट और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि आरोप तय होने और चार्जशीट दाखिल हो जाने के बावजूद अब तक ट्रायल शुरू नहीं हुआ है, जो अभियुक्तों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।
न्यायालय ने कहा कि रिंकू थापर से किसी भी प्रकार का नशीला पदार्थ बरामद नहीं हुआ, जबकि दिव्यम से केवल 381 ग्राम चरस बरामद हुई जो एनडीपीएस एक्ट के तहत वाणिज्यिक मात्रा से काफी कम है। रिंकू थापर के पास से हथियार, गोला-बारूद, हिरण की खाल, सींग, नकदी और वाहन बरामद हुए थे लेकिन जब एनडीपीएस अधिनियम के तहत कोई बरामदगी नहीं है तो केवल अन्य अधिनियमों के आधार पर जमानत रोकी नहीं जा सकती।
साथ ही आर्म्स एक्ट और वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट में एनडीपीएस की धारा 37 जैसा कोई कठोर प्रावधान नहीं है। कोर्ट ने समानता के सिद्धांत को भी महत्वपूर्ण माना क्योंकि इस मामले में इससे पहले 7 सह-आरोपियों चंदन शर्मा, हरविंदर सिंह, आकाश शर्मा, अरविंदर सिंह उर्फ गावी, कमल कुमार, विशाल सिंह उर्फ राजा और अंकुश भट्टी को 7 मई 2025 को जमानत मिल चुकी है। कोर्ट ने इस तथ्य पर भी गंभीर टिप्पणी की कि अभियोजन पक्ष ने 42 गवाहों की सूची दी है लेकिन अब तक एक भी गवाह पेश नहीं हुआ।
राज्य सरकार ने आरोप लगाया कि आरोपी एक संगठित गिरोह का हिस्सा है और ड्रग्स, हथियार व वन्यजीव तस्करी में संलिप्त हैं लेकिन कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है जिससे यह सिद्ध हो कि आरोपी किसी संगठित गिरोह का हिस्सा हैं या उनके खिलाफ पूर्व में कोई आपराधिक इतिहास है। अंत में हाईकोर्ट ने दोनों आरोपियों को उचित जमानत एवं मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया।