चंडीगढ़। विजिलेंस ब्यूरो के ट्रैप के लिए अपनी जेब से 20 लाख रुपये खर्च कर हरियाणा लोक सेवा आयोग में डेंटल सर्जन और एचसीएस (कार्यकारी शाखा) के फर्जीवाड़े का खुलासा करने वाला शिकायतकर्ता अपनी ही राशि पाने के कानूनी लड़ाई लड़ने को मजबूर है। एक साल बीत जाने और विजिलेंस ब्यूरो द्वारा एनओसी दिए जाने के बावजूद हरियाणा सरकार की ओर से शिकायतकर्ता को राशि वापस नहीं दी गई है। अब हरियाणा सरकार की ओर से विजिलेंस ब्यूरो को ट्रैप में इस्तेमाल किए जाने के लिए एक करोड़ की राशि मंजूर की है। अब शिकायतकर्ता अपने पैसे वापस मिलने की उम्मीद जगी है। शिकायकर्ता ने पंचकूला की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश की अदालत में अर्जी लगाई है। अब शिकायतकर्ता को फैसले का इंतजार है।
17 नवंबर, 2021 को डेंटल सर्जन और एचसीएस की भर्ती में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा सामने आया था। इस मामले में हिसार के उकलाना के गांव दौलतपुर निवासी नरेंद्र सिंह ने विजिलेंस को शिकायत दी थी। नरेंद्र की शिकायत थी कि भिवानी निवासी नवीन 20 लाख रुपये लेकर परीक्षा पास कराने का दावा कर रहा है। इस पर विजिलेंस ने ट्रैप लगाते हुए 20 लाख रुपये की नकदी के साथ आरोपी नवीन को पंचकूला से गिरफ्तार किया। नवीन के बाद झज्जर से अश्वनी शर्मा को लाखों रुपये के साथ काबू किया गया। इसके बाद 90 लाख रुपये की रिश्वत के साथ एचपीएससी के उप सचिव अनिल नागर को गिरफ्तार किया गया। बाद में हरियाणा सरकार ने नागर को नौकरी से बर्खास्त भी कर दिया। क्योंकि विजिलेंस ट्रैप के लिए नरेंद्र सिंह अपने पास से 20 लाख रुपये दिए थे। एक साल के करीब होने के चलते अब नरेंद्र इस राशि को वापस मांग रहा है, लेकिन केस प्रापर्टी बताकर उसे राशि वापस नहीं दी जा रही है। इस मामले में हरियाणा राज्य सतर्कता ब्यूरो भी एनओसी दे चुकी है, लेकिन राशि अब तक नहीं मिली है। अब हरियाणा सरकार की ओर से विजिलेंस ब्यूरो के लिए ट्रैप में इस्तेमाल की जाने वाली राशि के लिए 1 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। शिकायतकर्ता अब इसी 1 करोड़ रुपये के फंड से अपनी 20 लाख रुपये की राशि मांग रहा है। सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाकर थक चुके नरेंद्र सिंह ने अब अदालत का सहारा लिया है। उधर, इस बारे में विजिलेंस के अधिकारी ने बताया कि विजिलेंस को कोई आपत्ति नहीं है। अदालत जैसा आदेश करेगा, मान्य होगा। अगर अदालत आदेश देती है विजिलेंस अपने एक करोड़ के फंड से 20 लाख रुपये की राशि नरेंद्र सिंह को दे देगी। क्योंकि उसके द्वारा दी गई राशि केस प्रापर्टी हैं, केस निपटारे के बाद ही यह राशि वापस मिल सकती है।
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मालखाने या ट्रेजरी में जमा हो जाती है पकड़ी गई राशि
विजिलेंस द्वारा ट्रैप में पकड़ी गई राशि को सील बंद करे संबंधित थाने के मालखाने में दर्ज किया जाता है। इसके बाद उस राशि को संबंधित ट्रेजरी (कोषागार) में जमा करा दिया जाता है। जब भी अदालत पकड़ी गई राशि को अदालत में पेश करने के लिए आदेश करती है तो उस राशि को बाहर निकाला जाता है। एचपीएससी के मामले में भी यही है कि 20 लाख रुपये की राशि ट्रेजरी में जमा है। इसलिए उसे केस फाइनल होने से पहले किसी को नहीं दिया जा सकता है।