हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी याचिकाओं पर लगनी चाहिए रोक
अपने कृत्यों को छिपाने के लिए जीवन व स्वतंत्रता की आड़ नहीं ली जा सकती
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के नाम पर दायर याचिकाओं के दुरुपयोग पर गंभीर चिंता जताई है। जस्टिस विक्रम अग्रवाल ने कहा कि कुछ याचिकाकर्ता अपने कृत्यों को छिपाने के लिए इन सांविधानिक उपायों का सहारा लेते हैं। अदालत ने ऐसी याचिकाओं के दुरुपयोग पर उचित मामले में विचार करने की बात कही है।
यह मामला संगरूर निवासी एक याचिकाकर्ता से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ने अपनी जान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा मांगी थी। उसने पुलिस अधिकारियों पर प्रताड़ना और अवैध छापों का आरोप लगाया था। पुलिस ने बिना तलाशी वारंट उसके घर छापा मारकर बुलेट मोटरसाइकिल, कार और 50 ग्राम सोना ले लिया। पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को आरोपों पर संक्षिप्त शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया था।
पुलिस जांच और कोर्ट का रुख :
सुनवाई के दौरान संगरूर जिले के भवानीगढ़ उपमंडल के पुलिस उपाधीक्षक ने शपथपत्र पेश किया। इसमें बताया गया कि भवानीगढ़ थाना प्रभारी ने याचिकाकर्ता की शिकायत की जांच की थी। जांच रिपोर्ट में आरोपों को झूठा और निराधार बताया गया। रिपोर्ट के अनुसार, शिकायत का उद्देश्य पुलिस विभाग पर दबाव बनाना था। इसका मकसद पुलिस अधिकारियों को नशीले पदार्थों की बिक्री से जुड़ी कथित गतिविधियों में कानूनी कार्रवाई करने से रोकना प्रतीत हुआ।
जस्टिस विक्रम अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा से जुड़ी याचिकाएं वास्तविक खतरे में महत्वपूर्ण सांविधानिक उपाय हैं। हालांकि, उनका इस्तेमाल अपने कथित कृत्यों को छिपाने के लिए नहीं किया जा सकता।