चंडीगढ़। स्वास्थ्य कर्मियों को बंधक बनाकर मुर्दा घर से शव को उसके रिश्तेदारों द्वारा जबरन ले जाने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने आरोपी महिला को अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी है।
मामला बरनाला का है, जहां पर एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। नियम के मुताबिक शव परिजनों को सौंपने से पहले कोरोना की जांच अनिवार्य होती है लेकिन मृतक के परिजन लगातार मृतक का शव देने की मांग कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने स्टाफ को बंदी बनाया और समूह ने शव को मुर्दा घर से अपने कब्जे में ले लिया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने 25 जून को मामला दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी थी। आरोपी महिला संदीप कौर ने कहा कि उसे इस मामले में फंसाया जा रहा है। उसका ना तो मृतक से कोई लेना-देना है ना ही वहां पर जिन लोगों द्वारा कर्मियों को बंदी बनाया गया था उनसे। उच्च न्यायालय ने पंजाब सरकार से पूछा था कि आखिर किस आधार पर इस मामले में महिला का नाम शामिल किया गया है। इस पर पंजाब सरकार ने न्यायालय को बताया कि आरोपी महिला मृतक की रिश्ते में बहन लगती है। साथ ही यह भी बताया कि वारदात के स्थान पर लगे सीसीटीवी कैमरे में वह साफ दिखाई दे रही है और वह उस समूह की सदस्य थी जिसने शव को अपने कब्जे में लिया। उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि मेडिकल स्टाफ जान जोखिम में डालकर कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अपनी भूमिका निभा रहा है और ऐसे में उनसे इस प्रकार का व्यवहार किसी भी स्थिति में माफी योग्य नहीं है।