चंडीगढ़। क्या आप जानते हैं कि ब्लड प्रेशर की एक छोटी सी लापरवाही आपकी किडनी को धीरे-धीरे खराब कर सकती है। बिना किसी बड़े लक्षण के अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर किडनी फेल होने का सबसे बड़ा कारण बन सकता है।
इसी खतरे को समझाने के लिए पीजीआई के आहार विज्ञान विभाग ने विश्व किडनी दिवस के उपलक्ष्य पर विशेष जागरूकता अभियान चलाया। इस दौरान नई ओपीडी, उन्नत हृदय केंद्र सहित सभी ओपीडी में विशेष आहार परामर्श शिविर लगाए गए, जहां विशेषज्ञों ने बताया कि गलत खानपान और जीवनशैली किडनी की सेहत पर सीधा असर डालती है।
पीजीआई ने इस अभियान के तहत 60 मरीजों पर एक सर्वे किया। इसमें हैरान करने वाले तथ्य सामने आए कि लगभग आधे मरीज (48.6%) ब्लड प्रेशर की दवाएं नियमित रूप से नहीं लेते, क्योंकि उन्हें लगता है कि इसकी जरूरत नहीं। 31.4% मरीजों का मानना है कि जब ब्लड प्रेशर सामान्य लगे, तो दवा छोड़ सकते हैं, जबकि ऐसा करना किडनी के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।
9.1% मरीजों में रात में बार-बार पेशाब आना और पैरों में सूजन जैसे किडनी फेल के शुरुआती लक्षण पाए गए। 21% मरीजों ने ब्लड प्रेशर ठीक करने के लिए घरेलू नुस्खों और बिना वैज्ञानिक प्रमाण वाले उपायों का सहारा लिया। 70.45% मरीजों की फल और सब्जियों की खपत बेहद कम थी, जबकि ये हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। 54.55% मरीज दिनभर में सिर्फ 3-4 गिलास पानी ही पीते हैं, जो किडनी की सेहत के लिए नुकसानदेह है।
विशेषज्ञों की चेतावनी- जागरूकता ही बचाव है
कार्यक्रम में मुख्य आहार विशेषज्ञ डॉ. नैंसी साहनी, वरिष्ठ आहार विशेषज्ञ बीएन बेहड़ा, सुनीला छेत्री और प्रतिभा ने संतुलित आहार, उचित जल सेवन और नमक की सही मात्रा के महत्व पर जोर दिया। आंतरिक चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. आशीष भल्ला ने मरीजों को बताया कि ब्लड प्रेशर की दवाएं छोड़ना, हाई ब्लड प्रेशर के लक्षणों को नजरअंदाज करना और बिना सोचे-समझे वैकल्पिक चिकित्सा का सहारा लेना– ये सभी आदतें किडनी के लिए घातक हो सकती हैं।
पीजीआई का संकल्प – एक दिन नहीं, सालभर चलेगा अभियान
पीजीआई के अनुसार, यह अभियान सिर्फ एक दिन की जागरूकता तक सीमित नहीं रहेगा। मरीजों को लगातार सही आहार और जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा ताकि वे खुद को किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियों से बचा सकें।