हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर
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उच्च न्यायालय की एकल पीठ द्वारा निजी स्कूलों को ट्यूशन फीस के साथ ही वार्षिक शुल्क और अन्य प्रकार के शुल्क लेने की अनुमति देने वाले आदेश को हरियाणा ने भी खंडपीठ में चुनौती दे दी है। उच्च न्यायालय अब इन दोनों अपील पर 1 अक्टूबर को सुनवाई करेगा।
अपील में हरियाणा सरकार ने कहा कि एकल बेंच ने स्कूलों के हक में अपना फैसला सुनाते हुए सरकार और अभिभावकों द्वारा दी गई दलीलों पर गौर नहीं किया। अभिभावकों को झटका देते हुए 27 जुलाई के फैसले में स्कूलों को बिना कोई सुविधा दिए फीस वसूली की अनुमति दे दी गई। हरियाणा सरकार ने कहा कि राज्य के निजी स्कूलों के मामले में पंजाब को लेकर 30 जून को सुनाए गए फैसले के आधार पर ही फैसला सुना दिया गया। हैरत की बात तो यह रही कि एकल बेंच ने ऑनलाइन क्लास ना लेने वाले स्कूलों को भी ट्यूशन में एडमिशन फीस लेने की अनुमति दे दी।
अभिभावकों को राहत के नाम पर बस इतना दिया गया कि वह यदि फीस देने में सक्षम नहीं है तो स्कूल को इसके लिए अर्जी देंगे जिस पर स्कूल संवेदनशीलता से गौर करेंगे। इसके बाद सब स्कूल पर छोड़ दिया गया कि वे चाहें तो फीस माफ कर दें या बाद में ले ले। यदि स्कूल का निर्णय उन्हें सही ना लगे तो रेगुलेटरी बॉडी के समक्ष मांग करने का विकल्प उन्हें दिया गया जो असल में पहले से ही मौजूद है।
हरियाणा और पंजाब के मामले में लगभग एक जैसे आदेश हैं जिसको लेकर पंजाब सरकार पहले ही खंडपीठ में एकल बेंच के निर्णय को चुनौती दे चुकी है जो न्यायालय में विचाराधीन है। अब हरियाणा सरकार ने भी पंजाब की तर्ज पर एकल पीठ के इस निर्णय को खंडपीठ में चुनौती दे दी है जिस पर सुनवाई होनी अभी बाकी है।