पंचकूला। साइबर क्राइम थाना पंचकूला द्वारा दर्ज फर्जी काल सेंटर धोखाधड़ी के मामले में आरोपी विनोद कुमार निवासी गुरुग्राम की अग्रिम जमानत याचिका को जिला अदालत ने खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि मामले की गंभीर प्रकृति, ठगी के व्यापक जाल और बरामदगी की आवश्यकता को देखते हुए आरोपी विनोद को अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती।
यह मामला 21 अगस्त 2025 को सामने आया था, जिसमें पंचकूला साइबर क्राइम थाने में दर्ज किया गया था। पुलिस के अनुसार, 20 अगस्त की रात को सूचना मिली थी कि आईटी पार्क स्थित टिंन टावर और डीएचएसएल बिल्डिंग की अलग-अलग मंजिलों पर तीन फर्जी काल सेंटर चल रहे हैं। यहां विदेशी नागरिकों को नेटफ्लिक्स और अमेजन की कस्टमर सर्विस के नाम पर तकनीकी सहायता का झांसा देकर ठगा जा रहा था।
पुलिस ने एक साथ तीन टीमें बनाकर छापेमारी की, जहां 28 युवक-युवतियां लैपटाप और हेडफोन पर आईबीम और एक्स लाइट डायलर साफ्टवेयर का उपयोग कर विदेशी ग्राहकों से धोखाधड़ी करते मिले। मौके से 84 लैपटॉप, 20 मोबाइल फोन और 8.20 लाख की नकदी बरामद की गई।
जांच में खुलासा हुआ कि पहले टेलीकॉलर टीम विदेशी लोगों से जानकारी जुटाती थी। इसके बाद उन्हें फर्जी बैंक अधिकारी बनकर फंसाती थी। अंत में फर्जी क्लोजर टीम उन्हें बिटकॉइन या कूपन के माध्यम से भुगतान कराने के लिए मजबूर करती थी।
मुख्य आरोपी महेश चंद्रशेखर शेट्टी की पहले ही गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि कुछ अन्य आरोपी फरार हैं। पुलिस ने अदालत को बताया कि गिरफ्तार आरोपी नरेंद्र ने पूछताछ में खुलासा किया कि फर्जीवाड़े से कमाए गए पैसे से खरीदे गए सोने के जेवर और प्रॉपर्टी के दस्तावेजों वाला बैग उसके ससुर विनोद कुमार और देवर विनय अपने साथ ले गए थे। इस बैग की बरामदगी अभी बाकी है, इसलिए आरोपी का पुलिस हिरासत में आना आवश्यक है।
बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि आरोपी विनोद कुमार का कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं है। पुलिस ने उन्हें तथा उनके परिवार को अवैध रूप से हिरासत में लिया था, जिसके चलते हाईकोर्ट तक याचिकाएं दाखिल करनी पड़ीं। हालांकि अदालत ने रिकार्ड पर मौजूद आदेशों की समीक्षा करते हुए कहा कि अवैध हिरासत के आरोप साबित नहीं होते। साइबर फ्रॉड जैसी घटनाएं समाज में तेजी से बढ़ रही हैं। इनकी तह तक पहुंचने के लिए पुलिस को स्वतंत्र और प्रभावी जांच की आवश्यकता है। ऐसे में आरोपी की अग्रिम जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है।