बदलता भारत और इसकी प्रगति की कहानी बन रही हैं सेल्फ हेल्प समूह की महिलाएं, जो अंधियारे में रोशनी बिखेर रही हैं। ऐसी ही कहानी है गुजरात की अलका बेन की, जो पंचकूला सेक्टर-5 के सरस मेला में अपने उत्पाद प्रदर्शित कर रही हैं।
अलका बेन ने साल 2008 में अपने घर से हैंडमेड चादर और बैग बनाने का काम शुरू किया। शुरुआत में परिवार और समाज ने उनका उपहास उड़ाया और बार-बार समझाया कि घर की महिलाएं ऐसे काम नहीं करती लेकिन उन्होंने अपने सपनों से समझौता नहीं किया। चार बेटियों की जिम्मेदारी के बावजूद उन्होंने मेहनत और लगन से अपनी राह बनाई।
आज अलका बेन राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों में अपने उत्पाद प्रदर्शित करती हैं और 12-13 महिलाओं को रोजगार भी देती हैं। वे केवल रोजगार नहीं देतीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी देती हैं।
अलका बेन की चार बेटियां भी आत्मनिर्भर बन चुकी हैं, जिनमें से दो की शादी हो चुकी है, एक डॉक्टर है और एक बैंक में कार्यरत है। अलका बेन ने कहा कि जब मैंने शुरुआत की थी तो किसी ने विश्वास नहीं किया था कि मैं कुछ कर पाऊंगी, लेकिन आज मैंने सबको गलत साबित किया।
रोज 200 रुपये कमाए और फिर पाया मुकाम
शुरुआत में अलका बेन को काम में ज्यादा अनुभव नहीं था। उन्होंने सबसे पहले बंदरवार बनाना शुरू किया और अपने उत्पाद गांव के बाजार में बेचकर रोज लगभग 200 रुपये कमाए। धीरे-धीरे उन्होंने चादर और बैग बनाने का काम शुरू किया। एक बार उनके घर भोपाल से रिश्तेदार आए और देखा कि वह घर पर ही बैग और चादर बना रही हैं।
उन्होंने अलका बेन को अपने कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए सुझाव दिए और अलग-अलग राज्यों में उत्पाद बेचने की राह दिखाई। इसके बाद अलका बेन भोपाल गईं। हालांकि उनके पास वहां तक जाने के लिए पैसे भी नहीं थे। रिश्तेदारों ने उनकी टिकट और रहने की व्यवस्था की। कारोबार चलने के बाद 2015 से अलका बेन अलग-अलग राज्यों के मेलों में स्टॉल लगाने लगीं। उन्होंने केरल, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, बंगलुरु, कोलकात्ता, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में जाकर उत्पाद बड़े स्तर पर बेचे और देशभर में पहचान बनाई।