पंचकूला में सड़क, जल निकासी और ट्रैफिक व्यवस्था पर मानवाधिकार आयोग सख्त
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। शहर में सड़कों के सुधार, जल निकासी और यातायात व्यवस्था को लेकर किए जा रहे सरकारी दावों पर हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने कड़ा संज्ञान लिया है। नागरिक कल्याण संघ (सीडब्ल्यूए) की शिकायत को गंभीर मानते हुए आयोग के अध्यक्ष दीप भाटिया ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। मामले की अगली सुनवाई 11 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है।
सीडब्ल्यूए की ओर से शिकायतकर्ता एसके नैय्यर ने आरोप लगाया कि पिछले एक वर्ष में जिन प्रमुख सड़कों का जीर्णोद्धार किया गया, वे अब गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। इससे विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों और छोटे वाणिज्यिक वाहनों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। हैरानी की बात यह है कि मरम्मत कार्य की वारंटी अवधि शेष होने के बावजूद दोषी ठेकेदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
शिकायत में यह भी बताया गया कि रात के समय सड़क सुरक्षा के लिए लगाए गए कैट-आई और रिफ्लेक्टिव स्टड कई स्थानों से गायब हो चुके हैं। पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए जरूरी जेबरा क्रॉसिंग, ट्रैफिक साइन बोर्ड और अधिकतम गति सीमा संकेत या तो मिट चुके हैं या लगाए ही नहीं गए। मुख्य सड़कों पर साइकिल ट्रैक और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में चेतावनी संकेतों का भी अभाव है।
बरसात के मौसम में जल निकासी की समस्या और गंभीर हो जाती है। सेक्टर-8, 9, 10, 15, 19 और 20 में ड्रेनेज पाइप लाइनों में रुकावट के कारण बारिश का पानी घरों और बाजारों में घुस जाता है, जिससे आम नागरिकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। मानवाधिकार आयोग ने इन हालात को नागरिकों के मूल अधिकारों से जुड़ा मामला मानते हुए शीघ्र समाधान के निर्देश दिए हैं।