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नाक पर रुमाल रखकर गजरिए...आप पंचकूला में हैं

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पंचकूला। प्रदेश की छोटी राजधानी कहे जाने वाले पंचकूला शहर की सफाई व्यवस्था पटरी से उतरी हुई है। सफाई कर्मचारियों की लापरवाही के कारण शहर में ज्यादातर जगहों पर गंदगी फैली रहती है। ऐसे हालात तब हैं, जब शहर के विधायक और विधानसभा अध्यक्ष शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर अधिकारियों के साथ हर बैठक में चर्चा कर उनको निर्देश देते हैं। उनके निर्देशों को अधिकारी शायद गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। यही कारण है कि शहर में सफाई व्यवस्था का जनाजा निकला हुुआ है।
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नगर निगम में 670 सफाई कर्मचारी हैं। इनमें से 9 नियमित हैं बाकी पालिका रोल के आधार पर काम कर रहे हैं। नगर निगम के पास 100 डस्टबिन हैं, 8 ट्रैक्टर-ट्रॉली हैं। इसके अलावा न संसाधनों की कमी है, न ही सफाई कर्मचारियों की। मगर शहर को साफ रखने की नीयत में कमी होने के चलते शहर की सफाई व्यवस्था बदहाल हो गई है। जिम्मेवार अधिकारी भी इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
ग्रीन बेल्ट और फुटपाथ पर डालते हैं कचरा
शहर में 32 सेक्टर हैं। नगर निगम के पास 100 डस्टबिन हैं। इस हिसाब से हर सेक्टर में दो से तीन डस्टबिन रखे जाने चाहिए। मगर सेक्टरों में डस्टबिन रखे नजर नहीं आते हैं। लोग भी फुटपाथ और ग्रीन बेल्ट में ही कचरा फेंक देते हैं। सफाई कर्मचारी भी पेड़ों के पत्तों और धूल-मिट्टी को सफाई के बाद सड़क पर ही छोड़ देते हैं। हवा के साथ वे फिर से सड़क पर ही बिखर जाते हैं।
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सफाई कर्मचारियों को शहर की सफाई अच्छी तरह करने के निर्देश दिए गए हैं। फिर भी कहीं लापरवाही बरती जा रही है, तो इसकी जांच कराई जाएगी। शहर की सफाई व्यवस्था के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। - अविनाश सिंगला, सेनेटरी इंस्पेक्टर, नगर निगम
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