चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) की संपत्तियों के हस्तांतरण पर लगाई गई अंतरिम रोक को 13 मार्च तक जारी रखने का स्पष्ट आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई तक निगम की कोई भी अचल संपत्ति न तो बेची जाएगी और न ही हस्तांतरित की जाएगी। मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष राज्य सरकार ने स्टे हटाने की मांग की लेकिन अदालत ने फिलहाल राहत देने से इन्कार कर दिया।
पंजाब सरकार ने दलील दी कि सरकार संपत्ति बेच नहीं रही है बल्कि 30 साल पुरानी नीति के तहत विकास कार्यों के लिए हस्तांतरित कर रही है। सरकार ने कहा कि हम राज्य का विकास करना चाहते हैं और यह रिहायशी व व्यावसायिक विकास के लिए कदम है। यह पूरा मामला केवल एक समाचार रिपोर्ट के आधार पर खड़ा किया गया है और रिकॉर्ड पर ऐसा कोई प्रमाणित दस्तावेज नहीं है जिससे यह साबित हो कि पीएसपीसीएल बकाया वसूली न होने के कारण संपत्ति बेच रही है। सरकार ने कहा कि यह विषय जनहित याचिका के दायरे में नहीं आता और यह एक नीतिगत निर्णय है, जिसमें अदालत को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बलतेज सिंह सिद्धू ने राज्य के तर्कों का विरोध किया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अगस्त 2025 के अंत तक पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों पर पीएसपीसीएल के 2,582.24 करोड़ रुपये बिजली बकाया है। इसके अलावा 10,000 करोड़ से अधिक की बिजली सब्सिडी भी लंबित बताई गई है। इन भारी बकाया राशियों के कारण निगम वित्तीय संकट में है और इसी दबाव में उसे अपनी अचल संपत्तियां हस्तांतरित करनी पड़ रही हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि पीएसपीसीएल पर 2,500 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय बोझ है और इसी कारण संपत्तियां बेची जा रही हैं, तो यह निश्चित रूप से जनहित का विषय बनता है।