चंडीगढ़। पंजाब विजिलेंस ब्यूरो (वीबी) ने करोड़ों रुपये के सिंचाई विभाग घोटाले की जांच में क्लीन चिट दी है। इसमें अकाली-भाजपा सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री शरणजीत सिंह ढिल्लों, जनमेजा सेखों और पूर्व मुख्य सचिव शामिल हैं। विजिलेंस ब्यूरो ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दायर कर यह पुष्टि की है।
जांच में शरणजीत सिंह ढिल्लों, सेखों और अन्य के खिलाफ रिश्वतखोरी या किसी गलत काम का कोई सबूत नहीं मिला। यह जांच ठेकेदार गुरिंदर सिंह के 21 दिसंबर, 2017 को दिए गए एक प्रकटीकरण बयान पर दर्ज हुई थी। बयान के बाद कोई मौद्रिक बरामदगी या वित्तीय सुराग स्थापित नहीं हो सका। साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 के तहत बरामदगी के बिना अपुष्ट प्रकटीकरण बयान का कानूनी महत्व नहीं होता। 588 से अधिक पृष्ठों की जांच सामग्री और विभागीय रिकॉर्ड की समीक्षा की गई। कोई भी गवाह रिश्वतखोरी के आरोपों का समर्थन करने आगे नहीं आया।
जांच का समापन
हाईकोर्ट ने 15 मई, 2026 को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जांच को 15 दिनों में पूरा करने का निर्देश दिया था। इसके अनुपालन में सहायक पुलिस महानिरीक्षक ने अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की। मुख्य निदेशक, विजिलेंस ब्यूरो ने जांच को आधिकारिक तौर पर बंद करने की मंजूरी दी। मामला निविदा आवंटन में कथित अनियमितताओं से संबंधित था, जिसमें 32 व्यक्ति शामिल थे। पूर्व मंत्रियों के साथ तीन सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सर्वेश कौशल, केबीएस सिद्धू और काहन सिंह पन्नू को भी सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया है।