पंचकूला। गांव महेशपुर में नगर निगम की फिरनी पर कब्जे को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस विवाद को सुलझाने के लिए प्रशासन और निगम द्वारा सन् 1998 से लेकर 2021 के बीच कुल छह बार पैमाइश करवाई जा चुकी है। अब सातवीं बार उपायुक्त विनय प्रताप सिंह के आदेश पर डीजीपीएस (डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) से फिरनी की पैमाइश की जाएगी। वीरवार को प्रशासनिक अधिकारी गांव महेशपुर में पहुंचे, लेकिन तकनीकी खामियों के चलते पैमाइश नहीं हो पाई। अधिकारियों ने बताया कि अभी पैमाइश से संबंधित प्वाइंट को चिह्नित किया गया है, जिसे सिस्टम में फीड किया जाएगा। इस कार्य को वह 25 सितंबर से पहले पूरा कर लेंगे।
वर्तमान में सेक्टर-21 गांव महेशपुर में नगर निगम की फिरनी का विवाद जिला संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति में चल रहा है। शिकायतकर्ता सतीश गर्ग और संदीप सभ्रवाल का आरोप है कि सेक्टर-21 स्थित होटल इंडियन पैलेस के मालिक बलबीर बाल दंदयान ने सात फुट फिरनी पर अवैध कब्जा कर रखा है। वहीं, होटल के मालिक ने एक बोर्ड लगाकर दावा किया है कि यदि कोई व्यक्ति नगर निगम की फिरनी पर उनका कब्जा साबित कर दे तो वह उसे 10 लाख रुपया इनाम देंगे। इतना ही नहीं एक करोड़ रुपया जिला रेडक्रॉस सोसायटी को दान में देंगे, जिसे प्रदेश सरकार किसी भी कार्य में लगा सकती है।
फिरनी पर कब्जे को लेकर शुरू विवाद को सुलझाने के लिए अतिरिक्त उपायुक्त मोहम्मद इमरान रजा के आदेश पर कालका तहसील की टीम ने 2 जुलाई को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में पैमाइश की थी, जिसकी रिपोर्ट टीम ने अतिरिक्त उपायुक्त को सौंपी थी। इस पैमाइश की अधिकारियों ने वीडियोग्राफी भी करवाई थी, लेकिन शिकायतकर्ता सतीश गर्ग और संदीप सभ्रवाल पैमाइश के मापदंड से संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने उपायुक्त विनय प्रताप के समक्ष पेश होकर लिखित में आपत्ति जताई थी। इसके बाद उपायुक्त ने डीजीपीएस से दोबारा पैमाइश करने का आदेश जारी किया था।
इंडियन होटल के मालिक बलबीर पाल दंदयान का कहना है कि इस मामले को सुलझाने के लिए नगर निगम द्वारा भी पैमाइश की जा चुकी है। लेकिन, निगम अधिकारियों द्वारा की गई पैमाइश की रिपोर्ट में भी कब्जा नहीं मिला। इतना ही नहीं राजस्व रिकार्ड के मुताबिक भी पैमाइश हो चुकी है, लेकिन किसी तरह का कब्जा नहीं पाया गया है। लेकिन शिकायतकर्ता किसी भी सूरत में मानने को तैयार नहीं है। उधर, शिकायकर्ता सतीश गर्ग और संदीप सभ्रवाल का कहना है कि न्यायालय में यह साबित हो चुका है कि सतीश गर्ग के आगे निगम की जमीन पर अवैध कब्जा है। वहीं, यह मामला कोर्ट में भी विचाराधीन है।