पंचकूला। सेक्टर-6 सिविल अस्पताल के गाइनी वार्ड के लेबर रूम में मंगलवार शाम करीब पांच बजे अचानक आग लगने से हड़कंप मच गया। लेबर रूम से उठते धुएं को देखते ही साथ बने महिला वार्ड में भर्ती मरीजों और तीमारदारों में भगदड़ मच गई। पहली मंजिल पर बने गाइनी वार्ड और महिला वार्ड में उस वक्त करीब 100 मरीज भर्ती थे जबकि रोजाना यहां 18 से 20 डिलीवरी होती हैं, जिनमें तीन सिजेरियन शामिल रहती हैं। आग की खबर फैलते ही गर्भवती महिलाएं, नवजातों की माताएं और उनके परिजन डर के मारे वार्ड छोड़कर बाहर की ओर भागने लगे। कुछ महिलाएं स्ट्रेचर पर थीं तो कुछ को तीमारदार गोद में उठाकर सीढ़ियों की ओर ले जाते दिखे।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक लेबर रूम में रखा रूम हीटर चल रहा था। इसी दौरान उसमें शॉर्ट सर्किट हुआ और अचानक आग भड़क उठी। आग की लपटें हीटर से पर्दों तक पहुंच गईं और कुछ ही मिनटों में पूरे वार्ड में धुआं भर गया। धुएं से सांस लेने में दिक्कत होने लगी, जिससे मरीजों और तीमारदारों में दहशत फैल गई। लोग चिल्लाते हुए बाहर निकलने लगे। आग…आग… की आवाजें गूंजती रहीं और कुछ देर के लिए अस्पताल का माहौल पूरी तरह अफरा-तफरी में बदल गया।
सूचना मिलते ही अस्पताल की बिजली विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तुरंत बिजली सप्लाई काटकर आग पर काबू पाया। समय रहते आग बुझा ली गई, जिससे बड़ा हादसा टल गया। हालांकि, हीटर पूरी तरह जल गया। गनीमत रही कि आग लेबर रूम तक ही सीमित रही अन्यथा पहली मंजिल पर मौजूद महिला वार्ड, सर्जरी वार्ड और अन्य यूनिट्स को बड़ा नुकसान हो सकता था। घटना के बाद अस्पताल में देर शाम तक दहशत का माहौल बना रहा। मरीज और तीमारदार बार-बार यही सवाल करते दिखे कि अगर आग कुछ मिनट और फैल जाती तो क्या होता?
मरीजों और तीमारदारों ने बयां किया दर्द
बरवाला से आईं करुणा देवी ने बताया कि धुआं इतना ज्यादा था कि कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। हमारे मरीज अंदर थे, अचानक धुआं भर गया। समझ नहीं आ रहा था कि कहां जाएं। वहीं इंदिरा कॉलोनी से आए सुरेश कुमार और सुनील कुमार ने बताया कि उनके परिजन भर्ती हैं। धुआं देखकर सब बाहर भागे। ऐसे हालात में इलाज कराना भी डराने वाला लगने लगा है।
डी-ब्लॉक की फायर एनओसी अब भी अधर में
इस घटना ने सिविल अस्पताल की फायर सेफ्टी पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। सेक्टर-6 सिविल अस्पताल के डी-ब्लॉक की फायर एनओसी अभी तक नहीं मिली है। फायर विभाग की सर्वे रिपोर्ट में खामियां सामने आने के कारण एनओसी रोकी गई है। डी-ब्लॉक में इमरजेंसी वार्ड, महिला वार्ड, सर्जरी वार्ड, निक्कू वार्ड और पीडियाट्रिक वार्ड संचालित हैं। अगर आग फैल जाती तो स्थिति भयावह हो सकती थी। पीडब्ल्यूडी की ओर से मरम्मत और फायर सेफ्टी से जुड़ा काम चल रहा है, लेकिन अब तक यह पूरा नहीं हो सका है।
लेबर रूम में आग लगने की सूचना मिलते ही तुरंत काबू पा लिया गया। किसी तरह की जनहानि नहीं हुई है। सर्दियों में इस्तेमाल हो रहे सभी हीटरों की जांच के निर्देश दिए गए हैं। -डॉ. मुक्ता कुमार, सीएमओ, सिविल अस्पताल सेक्टर-6
सिविल अस्पताल के डी-ब्लॉक की फायर एनओसी अभी नहीं है। पीडब्ल्यूडी की ओर से काम पूरा होने के बाद ही एनओसी जारी की जाएगी। -तरसेम सिंह, फायर ऑफिसर, पंचकूला