चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने वाहन हादसे से जुड़े एक मामले में एमएसीटी के फैसले के खिलाफ याचिका को खारिज करते हुए कहा कि एफआईआर किसी घटना या दुर्घटना का एनसाइक्लोपीडिया नहीं होता जो उसमें घटना का पूरा विवरण शामिल हो। एफआईआर कानूनी मशीनरी को केवल हरकत में लाने के लिए होती है।
फतेहगढ़ साहिब में हुई सड़क दुर्घटना में व्यक्ति की मौत के मामले में आरोपी ड्राइवर ने अपील दाखिल करते हुए कहा था कि इस मामले में एफआईआर देरी से दर्ज की गई थी। जब एफआईआर दर्ज की गई थी तो उसके ट्रक का नंबर उसमें मौजूद नहीं था। हाईकोर्ट ने कहा कि एफआईआर दर्ज करने के बाद पुलिस घटना या दुर्घटना की जांच शुरू करती है। जांच में तथ्य सामने आते हैं और पुलिस पता लगाती है कि दोषी कौन है। एफआईआर दर्ज करने में देरी के लिए कई कारण हो सकते हैं और इनका स्पष्टीकरण जरूरी होता है। केवल देरी के आधार पर एफआईआर पर सवाल उठाना ठीक नहीं है। खासतौर पर सड़क दुर्घटना के बाद पीड़ित पक्ष सदमे में होता है और ऐसे में देरी संभव है। साथ ही एफआईआर में हर तथ्य की जानकारी हो यह भी संभव नहीं है। ऐसे में हाईकोर्ट ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल के आदेश पर मुहर लगाते हुए अपील को खारिज कर दिया।