मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने रविवार को भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) से आग्रह किया कि वे 28 मई से पटियाला में प्रस्तावित अपना तीन दिवसीय धरना न दें। कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के पटियाला में धरने से पंजाब में संक्रमण तेजी से फैल सकता है।
मुख्यमंत्री ने कोविड महामारी के साथ कारगर ढंग से निपटने में राज्य सरकार के नाकाम रहने के लगाए आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) को अपने प्रस्तावित धरने के लिए आगे न बढ़ने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह धरना बड़े स्तर पर कोरोना फैलने का कारण बन सकता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने पंजाब के हालात दिल्ली, महाराष्ट्र जैसे राज्यों जैसे होने से रोकने में सख्त लड़ाई लड़ी है। यहां तक कि उत्तर प्रदेश जहां गंगा नदी में तैरती लाशों ने भाजपा के सत्ता वाले राज्य की इस महामारी के साथ निपटने में कुप्रबंधों का पर्दाफाश करके रख दिया।
कैप्टन ने कहा कि पटियाला में भाकियू (एकता उगराहां) के 28 मई से तीन दिवसीय प्रस्तावित धरने जैसी कोई भी गतिविधि राज्य में कोविड से निपटने के लिए उनकी सरकार की तरफ से अब तक की कोशिशों पर पानी फेर सकती है। मुख्यमंत्री ने किसान जत्थेबंदी को महामारी के समय खास कर जब राज्य में सभी तरह की भीड़ पर पाबंदी है, तो लापरवाही न करने और लोगों की जिंदगियां खतरे में न डालने की अपील की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पाबंदी का उल्लंघन पंजाब और यहां के लोगों के हितों के लिए बहुत घातक सिद्ध होगी। ऐसे धरने में मुख्य तौर पर गांवों के लोग शामिल होंगे, जबकि गांव महामारी की दूसरी लहर के दौरान किसी न किसी हालत में संकट में से गुजर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कोविड संबंधी एहतियात में लापरवाही बरतने की कोई गुंजाइश नहीं है, यदि किसी किस्म की रैलियां या धरने उस समय पर पूरी तरह नामंजूर हैं, जब लोगों की जिंदगी दांव पर लगी हो।