चंडीगढ़ में की बैठक, 6 अक्तूबर को जिलों में विरोध प्रदर्शन करने का एलान
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब के किसान नेताओं ने राज्य सरकार से श्वेत पत्र जारी कर बाढ़ के दौरान किसानों को मिले मुआवजे की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। किसान-मजदूर मोर्चे की एक बैठक शनिवार को किसान भवन में संपन्न हुई।
इस दौरान किसान जत्थेबंदियों के नेताओं ने विभिन्न मसलों पर चर्चा की। बैठक में इस साल की भयंकर बाढ़ के लिए प्रदेश और केंद्र सरकार दोनों को जिम्मेदार बताया। मोर्चे के नेताओं ने पंजाब सरकार को चुनौती दी कि वह एक श्वेत पत्र जारी करे, जिसमें यह साफ हो कि साल 2023 की बाढ़ के दौरान कितने किसानों को मुआवजा मिला और कितने पीड़ित अब तक बेसहारा छोड़े गए।
मोर्चे ने एलान किया कि 6 अक्टूबर को जिलों में पुतले फूंके जाएंगे। मोर्चे ने अपनी मुख्य मांग दोहराई कि बाढ़ प्रभावित किसानों को कम से कम 70,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा और खेत मजदूरों को कुल का 10 प्रतिशत मुआवजा दिया जाए।
इस दौरान कई गंभीर मुद्दों पर चर्चा की गई और अपने विभिन्न विषयों पर स्पष्ट रुख रखा। पराली जलाने के मुद्दे पर नेताओं ने ताजा आंकड़े और अध्ययन पेश किए जिनके अनुसार किसानों का प्रदूषण में योगदान 6% से भी कम है। इसके बावजूद अदालतें और सरकारें सारा दोष किसानों पर मढ़ रही हैं और उन पर कड़े जुर्माने व सजाएं तय कर रही हैं।