बंसल ने कहा कि एक दशक से अधिक सेवा देने वाले कर्मचारियों को अचानक बाहर करना संवेदनशीलता और न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने प्रशासक से मांग की कि सेवा समाप्ति की प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए और अनुभवी सीटीयू कर्मचारियों को नई इलेक्ट्रिक बसें चलाने का अवसर दिया जाए।
बंसल ने कहा कि हाल में कई ड्राइवरों और कंडक्टरों को ड्यूटी पर उपस्थित न होने के नोटिस दिए गए हैं, जो वास्तव में सेवा समाप्ति जैसा कदम है। उन्होंने आशंका जताई कि नए 428 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन निर्माता कंपनियों को सौंपने की योजना के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है।
उन्होंने कहा कि बस निर्माता केवल वारंटी मामलों के लिए जिम्मेदार होते हैं, सार्वजनिक परिवहन संचालन उनका काम नहीं है। यह कदम सीटीयू के संचालन को निजी हाथों में देने जैसा होगा, जबकि बसें प्रशासन ने स्वयं खरीदी हैं। उन्होंने कहा कि कई प्रभावित कर्मचारी अब 35 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा पार कर चुके हैं, जिससे वे नई सरकारी भर्ती के योग्य नहीं रहते। यदि उन्हें निर्माता कंपनियों से दोबारा काम लेना पड़ेगा तो उन्हें कम वेतन पर वही काम करना पड़ेगा, जो अन्यायपूर्ण है।