सरकार व उद्यमी हर संभव मदद का भरोसा दे रहे हैं लेकिन दूसरे राज्यों के मजदूर आये दिन घर का रुख करने पर आमादा हैं। हालांकि 7 दिन के लॉकडाउन में उद्योगों को छूट दी गई है, बावजूद इसके बेहद कम मजदूर काम पर आ रहे हैं।
उद्यमियों को इस बात की चिंता है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो उन्हें आर्थिक रूप से काफी नुकसान उठाना पड़ेगा। क्योंकि, सरकार ने पिछले साल लॉकडाउन के समय का भी पूरा बिजली का बिल, टैक्स व्यापारी व उद्योगपतियों से वसूल किया था।
सोनीपत, बहादुरगढ़ में किसान आंदोलन के कारण उद्यमियों को पहले ही 20 हजार करोड़ से अधिक की वित्तीय चपत लग चुकी है। इसकी भरपाई होना तो दूर कोरोना की दूसरी लहर ने और गहरी चोट की है।
हरियाणा में अस्थायी लॉकडाउन, भ्रमित न हों मजदूर : गर्ग
प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष बजरंग गर्ग ने सोमवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग से व्यापारी व उद्योगपतियों से बातचीत की। उन्होंने बैठक के बाद मजदूरों से अपील की है कि वे हरियाणा से अपने घरों को वापसी ना करें।हरियाणा में अस्थायी लॉकडाउन है। उन्होंने कहा कि 70 फीसदी तक मजदूरों के पलायन का डाटा उद्यमियों की ओर से मुहैया कराया गया है।
सरकार मजदूरों के लिए हर तरह के इंतजाम कर रही है। उन्हें खाने-पीने की दिक्कत नहीं आएगी। रोजगार का संकट भी नहीं है। उद्यमियों को शिफ्ट में काम लेने का विकल्प पहले ही दिया जा चुका है। मजदूर यहीं रहकर कार्य करें। कोविड से मिलकर लड़ाई लड़ेंगे, उन्हें कोई परेशानी नहीं आने देंगे। - मनोहर लाल, मुख्यमंत्री।