सोमवार को जब राजिंदरा अस्पताल का दौरा किया तो वहां अस्पताल परिसर में नौजवान संजू निवासी मंडी गोबिंदगढ़ अपने रिश्तेदारों के साथ विलाप कर रहा था। उसने बताया कि माता बलवीर कौर राजिंदरा में उपचाराधीन थीं। सुबह बताया कि माता बिल्कुल ठीक है। आधे घंटे बाद मौत की सूचना दे दी। सुबह से लेकर अब बाद दोपहर हो गई, शव नहीं दिया जा रहा है। कंट्रोल रूम वाले फोन नहीं उठाते। कोविड वार्ड वालों ने मोर्चरी भेज दिया।
मोर्चरी की सिक्योरिटी वाले धक्के मार रहे हैं। कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। इसी बीच कंट्रोल रूम पर जब दोबारा संपर्क किया तो बताया गया कि मोर्चरी में शव रखने की जगह नहीं। जब जगह बनेगी तो वहां माता का शव पहुंचेगा। इसके बाद ही मिल पाएगा।
नौजवान ने आरोप लगाया कि माता के इलाज में डॉक्टरों ने लापरवाही बरती, जिस कारण मौत हुई है। अब वह मां का शव पाने को भटक रहा है। इसी तरह का एक मामला दो-तीन दिन पहले सामने आया था जब कोरोना के कारण सरकारी वकील की मौत के बाद उनकी पत्नी को शव हासिल करने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ी थी।
मौतों की संख्या बढ़ने से हुई दिक्कत : एमएस
इस संबंध में रांजिंदरा के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. एचएस रेखी ने बताया कि कोविड के कारण मौतों की संख्या अधिक होने कारण दिक्कत हो रही है। उन्होंने कहा कि एक कोविड मरीज के शव को सैनिटाइज करने, पैकिंग करने, टैगिंग वगैरह करने में दो-तीन घंटे लगते हैं। टैगिंग भी जरूरी है, ताकि शवों की अदला-बदली न हो जाए। डॉक्टर कोरोना के इस संकट में दिन-रात काम करके अपना बेस्ट दे रहे हैं।