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Panchkula News: फॉग सेफ्टी डिवाइस और कवच के बाद भी ट्रेनों पर धुंध की मार

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पंचकूला। धुंध में ट्रेनों के परिचालन को बेहतर, सुगम और सुरक्षित करने की दिशा में लगातार बेहतर तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। इस दिशा में फॉग सेफ्टी डिवाइस और कवच जैसी आधुनिक तकनीक भी इंजन में लगाए जा रहे हैं। बावजूद धुंध ट्रेनों के परिचालन में बाधक बनी हुई है। रविवार को चंडीगढ़ से चलने वाली करीब 15 ट्रेनें अपने निर्धारित समय से लेट थीं। कालका-नई दिल्ली शताब्दी अपने निर्धारित समय से 8 घंटे विलंब से कालका से रवाना हुई।
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ट्रेन को री-शेड्यूल कर कालका से करीब रात आठ बजे चलाया गया। वहीं नई दिल्ली से कालका आने वाली शताब्दी अपने निर्धारित समय से करीब पौने पांच घंटे बिलंब से कालका पहुंची। चंडीगढ़-लखनऊ एक्सप्रेस सवा दो घंटे की देरी से चंडीगढ़ से चली। इस ट्रेन का समय चंडीगढ़ से रात को 9 बजे का है। इसे रात को करीब 11.35 चलाया गया। अंब अंदौरा से दिल्ली के बीच वाया चंडीगढ़ होकर जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस भी अपने निर्धारित समय से 2:24 घंटे की देरी से शाम करीब 5.15 बजे चंडीगढ़ पहुंची। मुंबई से अमृतसर के बीच चलते वाली पश्चिम एक्सप्रेस साढ़े चार घंटे विलंब से चंडीगढ़ से रवाना हुई।

ये ट्रेनें हुईं लेट
-ऊंचाहार एक्सप्रेस 13:30 घंटा
-जम्मू-टाटा नगर एक्सप्रेस 1:05 घंटा
-नई दिल्ली जन शताब्दी 30 मिनट
-नई दिल्ली-अंब-अंदौरा 3:39 घंटा
-लखनऊ-चंडीगढ़ एक्सप्रेस 4:18 घंटा
-एकता एक्सप्रेस 1:40 घंटा
-हावड़ा-कालका 2:30 मिनट
-नई दिल्ली जन शताब्दी-30 मिनट

कोहरे का काट क्यों नहीं
एक लोको पायलट ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि फॉग सेफ्टी डिवाइस जियो मैपिंग डिवाइस है। इसकी खासियत यह है कि यह ट्रेन को आने वाले सिग्नल के बारे में अलर्ट करता है। सिग्नल आने से करीब 500 मीटर पहले यह डिवाइस ड्राइवर को अलर्ट देता है। यह केवल सिग्नल के बारे में बताता है। रेड, ग्रीन, येलो सिग्नल ड्राइवर को पास जाने पर ही पता चलता है। धुंध ज्यादा रहती है तो ट्रैक नहीं दिखता है। अगर ट्रैक पर किसी प्रकार की रुकावट है, तो उसमें यह डिवाइस मदद नहीं करता है।
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कवच भी सेफ्टी डिवाइस
अगर एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनें हैं, और लोको पायलट नहीं देख पाता है तो कवच खुद ब खुद ब्रेक लगा देता है। यह सुरक्षा के मानक पर कारगर तकनीक है। हालांकि, रेलवे के अधिकारी का कहना है कि 15 से 20 पर्सेंट से स्पीड में भी सुधार होता है। अगर डिवाइस नहीं होता है तो लोको पायलट अपनी स्पीड कम कर देता है।
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