चंडीगढ़। किसान आंदोलन के दौरान 5 दिसंबर 2020 को टिकरी बॉर्डर पर हड़ताल में शामिल होने का आरोप लगाते हुए बर्खास्त सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर की याचिका पर जवाब देते हुए हरियाणा सरकार ने आरोपों को नकारा है। सरकार ने कहा कि कर्मचारी के आचरण की प्राथमिक जांच की गई और उसे निलंबित रखा गया। जांच पूरी होने के बाद उसे बर्खास्त करने का आदेश जारी किया गया था। हाईकोर्ट ने जवाब को रिकार्ड पर लेते हुए सुनवाई स्थगित कर दी।
याचिका दाखिल करते हुए रजुद्दीन ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को बताया कि नेशनल हेल्थ मिशन के तहत मेवात के सिविल सर्जन ने उसे 2014 में सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर पद पर नियुक्त किया था। तब से वह अपना काम ईमानदारी और बिना किसी शिकायत के कर रहा है। अचानक 25 फरवरी 2021 को उसकी बर्खास्तगी का आदेश थमा दिया गया और बताया गया कि ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि वह 5 दिसंबर 2020 को किसानों द्वारा आयोजित हड़ताल में शामिल हुआ था। याची ने कहा कि उसे बर्खास्त करने से पहले उसे पक्ष रखने तक का मौका नहीं दिया गया। रजुद्दीन ने कहा कि उस पर लगाया गया आरोप सरासर गलत है और बर्खास्तगी का आदेश को खारिज किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने अगले आदेश तक मेवात के नूंह स्थित सामुदायिक केंद्र में उस पद को रिक्त रखने का आदेश दिया है, जिससे याची को बर्खास्त किया गया था।