साक्ष्यों के अभाव में अदालत का फैसला, आरोप साबित करने में असफल रहा अभियोजन पक्ष
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। 55 वर्षीय महिला से दुष्कर्म, यौन उत्पीड़न और पीछा करने के चार साल पुराने मामले में पंचकूला जिला अदालत ने बिजली विभाग के एक लाइनमैन को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा।
अभियोजन के अनुसार मार्च 2022 में पंचकूला निवासी महिला के घर की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई थी। इस संबंध में उसने बिजली विभाग से संपर्क किया, जिसके बाद विभाग की ओर से उसे लाइनमैन का मोबाइल नंबर उपलब्ध कराया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि इसके बाद लाइनमैन ने महिला से मोबाइल पर संपर्क बढ़ाया, संदेश भेजे और बाद में उसके साथ दुष्कर्म किया।
महिला की शिकायत पर पिंजौर थाना पुलिस ने 17 मार्च 2022 को विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध करने का प्रयास किया।
वहीं बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि शिकायतकर्ता के विभिन्न बयानों में कई विरोधाभास हैं और अभियोजन की कहानी उपलब्ध साक्ष्यों से मेल नहीं खाती। बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि आरोपी को झूठे मामले में फंसाया गया है।
दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने पाया कि अभियोजन आरोपों को पर्याप्त रूप से साबित नहीं कर सका। इसके चलते अदालत ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया।