अभिभावक बोले- निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के बाद विभाग नींद से जागा
सत्र शुरू हाेने से पहले शिक्षा विभाग ने नहीं की कोई कार्रवाई, अभिभावकों पर पड़ा आर्थिक बोझ
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। शहर के निजी स्कूलों के लिए शिक्षा विभाग की ओर से मंगलवार को एनसीईआरटी की किताबें लागू करने का नोटिफिकेशन जारी किया गया है। इस पर अभिभावक सचिन सिंह, जोगिंद्र सिंह, नताशा, राजेंद्र कुमार और सुनील का कहना है कि 70 फीसदी लोग निजी प्रकाशकों की किताबें खरीद चुके हैं। सत्र शुरू होने से पहले इस मामले में विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इतनी देरी से शिक्षा विभाग के अधिकारी विभाग नींद से जागे हैं। लगता ही नहीं है कि निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने वाला कोई विभाग है। यह नोटिफिकेशन तब जारी किया जा रहा है, जब वह निजी स्कूलों के आदेशों के मुताबिक अभिभावक महंगी किताबें खरीद चुके हैं।
अब भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या निजी स्कूल विभाग के आदेश मनेंगे। सूत्रों के अनुसार एनसीईआरटी की किताबें निजी स्कूलों में नहीं पढ़ाई जा रही हैं। शिक्षा विभाग मात्र औपचारिकता निभाने में जुटा है, ताकि कोई यह न कह सके कि उन्होंने नए सत्र में एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाने का नोटिफिकेशन नहीं जारी किया। विभाग की लापरवाही और लेटलतीफी का फायदा निजी स्कूलों ने खूब उठाया। मनमानी करते हुए निजी प्रकाशकों की किताबें अभिभावकों से जबरन खरीदवाई गईं।
लग रही आर्थिक चपत
अभिभावकों को ड्रेस और किताबें खरीदने में करीब दस हजार का फटका लग रहा है। उधर निर्देश जारी करने के बाद भी निजी स्कूलों ने वेबसाइट पर कोई जानकारी नहीं दी है। एक अभिभावक सुरेंद्र कुमार ने बताया कि निजी स्कूलों की मनमानी नहीं रुक रही है। शिक्षा विभाग के अधिकारी सेशन शुरू होने से पहले ऐसे मामलों के लिए कमेटी नहीं बनाते हैं। ऐसे में अभिभावकों को मिलकर लूटा जा रहा है।
कोट -
आदेशों का पालन करवाने के लिए शिक्षा विभाग कमेटी का गठन करेगा। इस तरह के मामलों के लिए कमेटी निजी स्कूलों में जाकर उनका रिकॉर्ड खंगालेगी। जो भी स्कूल मनमानी करेगा उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
सपताल कौशिक, जिला शिक्षा अधिकारी, पंचकूला शिक्षा विभाग