पंजाब में नशा तस्करों और सप्लायरों ने अपने काम को पुलिस की नजर से बचाकर जारी रखने के लिए नया तरीका खोज लिया है। नशा तस्कर अब नशे की सामग्री को लाने और ले जाने के लिए महिलाओं का इस्तेमाल करने लगे हैं। इतना ही नहीं, नशा तस्कर प्राइवेट वाहनों का इस्तेमाल करने के बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट के जरिये नशे की सप्लाई करने लगे हैं। यह जानकारी सोमवार को पंजाब पुलिस मुख्यालय के आईजीपी डॉ. सुखचैन सिंह गिल ने दी।
आईजीपी डा. गिल ने बताया कि सूबे में युवाओं को नशे के बुरे प्रभावों से बचाने के लिए सभी सीपी और एसएसपी द्वारा अपने-अपने जिलों में जागरूकता अभियान के तहत सार्वजनिक बैठकें, नशा प्रभावित गांवों का दौरा, सेमिनार, विधायकों-सरपंचों और काउंसिलरों के साथ साझा बैठकें करने के अलावा गैर-सरकारी संगठनों व यूथ क्लबों को शामिल कर विभिन्न गतिविधियां शुरू की गई हैं। इसके तहत बरनाला पुलिस द्वारा युवाओं को खेलों से जोड़ने और उनके शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने के लिए चार दिवसीय बास्केटबॉल लीग अंडर-17 (लड़के) करवाई गई है। इसी तरह मालेरकोटला पुलिस द्वारा ‘साझी सथ्थ’ के शीर्षक अधीन एक विशाल नशा विरोधी कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके तहत प्रत्येक एसएचओ अपनी टीम, जिसमें एक महिला पुलिस अधिकारी भी शामिल है, के साथ हर रोज शाम के समय एक गांव का दौरा कर ग्रामीणों के साथ गांव की किसी भी साझी जगह पर मुलाकात करते हैं। इसके साथ ही सबसे अधिक प्रभावित या हॉटस्पॉट क्षेत्रों का दौरा भी किया जा रहा है, जिससे लोगों को नशों के बुरे प्रभावों संबंधी जागरूक किया जा सके और उनको नशों से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जा सके।