सेक्टर-16 निवासी जेएल नंदा ने पड़ोस में स्टिल्ट प्लस 4 मंजिला भवन के निर्माण से उनके मकान के क्षतिग्रस्त होने की दी थी शिकायत
आदेश चौधरी
पंचकूला। एचएसवीपी अधिकारी इस कदर लापरवाह हैं कि मुख्यमंत्री कार्यालय से आए आदेशों को भी गंभीरता से नहीं ले रहे, जबकि मुख्यमंत्री ही एचएसवीपी के चेयरमैन भी हैं। एक मामले में कार्रवाई के लिए नौ बार मुख्यमंत्री कार्यालय से लिखा गया, मगर एचएसवीपी अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। शहर के सेक्टर-16 निवासी जेएल नंदा मकान नंबर 833 में रहते हैं। करीब पांच साल पहले उनके पड़ोस में शुरू हुए स्टिल्ट प्लस चार मंजिला भवन के कारण उनका मकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। कई दीवारों में दरारें आ गईं। एक स्टोर तो पूरी तरह खत्म ही हो गया। इसकी शिकायत उन्होंने एचएसवीपी और पुलिस को दी। कार्रवाई नहीं हुई तो सीएम विंडो पर शिकायत भेजी। अधिकारी पीड़ित को जांच के नाम पर बार-बार कार्यालय बुलाते रहे। अब एचएसवीपी के ईओ ने 20 अप्रैल को फिर से सुनवाई के लिए जेएल नंदा को अपने कार्यालय में बुलाया है। मगर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। जेएल नंदा ने बताया कि इस मामले में वे अब तक एचएसवीपी को 400 से ज्यादा पत्र लिख चुके हैं। अनगिनत बार एचएसवीपी कार्यालय के चक्कर लगाए। अधिकारी बदलते रहे और मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
काम रोकने के आदेश के बावजूद बन गई बिल्डिंग
जेएल नंदा की शिकायत पर एचएसवीपी ने मकान में नुकसान की जांच के लिए स्ट्रक्चरल इंजीनियर एके गुप्ता को नियुक्त किया। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा कि जेएल नंदा के मकान की नींव टूट गई है, इस कारण पूरी बिल्डिंग कमजोर हो गई है। इस रिपोर्ट पर एचएसवीपी ने निर्माणाधीन भवन के मालिक को निर्माण कार्य रोकने का नोटिस जारी किया। न भवन मालिक ने निर्माण रोका और न ही इस पर एचएसवीपी ने कोई कार्रवाई की। नतीजा कुछ ही दिन बाद भवन बनकर तैयार हो गया। एचएसवीपी के आदेशों को न मानकर भवन का निर्माण कार्य पूरा करने के बाद प्राधिकरण के अधिकारियों ने उसका ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया गया। इसके बारे में प्राधिकरण के अधिकारियों ने जेएल नंदा से सहमति लेने तक की जरूरत नहीं समझी।
सीएम ऑफिस ने कार्रवाई के दिए थे स्पष्ट निर्देश
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से पांच फरवरी 2022 को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि यह एचएसवीपी की लापरवाही का मामला है, सीएम कार्यालय ने निर्माणाधीन मकान मालिक के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए नौ स्पष्टीकरण दिए हैं। एचएसवीपी की ओर से नियुक्त स्ट्रक्चरल इंजीनियर एके गुप्ता की रिपोर्ट के अनुसार मकान की नींव टूट गई है, जिसके कारण मकान बहुत कमजोर हो गया है। दूसरा, एचएसवीपी ने काम रोकने के निर्देश दिए थे, मगर काम रोका नहीं गया। तीसरा, मकान बनने के बाद पीड़ित की सहमति के बगैर उसे ओसी भी जारी कर दी गई। इस मामले में जांच करने के निर्देश दिए गए थे।
जेएल नंदा की शिकायत से मैं वाकिफ हूं और जांच में ज्यादातर बातें उनकी सही पाई गई हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से भी इस मामले में कार्रवाई के सख्त निर्देश जारी किए गए थे। मगर कार्रवाई नहीं की गई। अब इस मामले में मैंने एचएसवीपी ईओ को दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उम्मीद है जल्द इस मामले में कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। -केसी भारद्वाज, एमिनेंट सदस्य, सीएम विंडो