अब अगर पोल्ट्री फार्म के मालिक पर्यावरण मंत्रालय की गाइडलाइन का पालन नहीं करेंगे तो उनके खिलाफ कार्यवाई की जा सकती है। इतना ही नहीं गाइडलाइन का पालन न करने वाले पोल्ट्री फार्म की पहचान होने के बाद खुद पंचकूला की उपायुक्त उसका औचक निरीक्षण करेंगी। रायपुररानी में मक्खियों की समस्या को लेकर उपायुक्त डॉक्टर गरिमा मित्तल की अध्यक्षता में खंड विकास और पंचायत अधिकारी कार्यालय रायपुररानी के सभागार में हुई बैठक के दौरान जिला उपायुक्त ने यह बात कही। बैठक में पोल्ट्री फार्म एसोसिएशन के प्रतिनिधि और सरपंचों ने भी भाग लिया।
उपायुक्त ने पोल्ट्री फार्म एसोसिएशन के प्रतिनिधियों और मालिकों को सख्त लहजे में आदेश दिए कि वह पर्यावरण मंत्रालय की गाइडलाइन का पालन करें। गाइडलाइन की अवहेलना करने वाले पोल्ट्री फार्म में मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उसके साथ ही उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जिले की 10 पोल्ट्री फार्मों की पहचान की गई है, जो मंत्रालय द्वारा जारी गाइड लाइन की पालना करने में कोताही बरत रहे हैं। उन्होंने खंड विकास और पंचायत अधिकारी रायपुररानी मार्टिना महाजन और खंड विकास और पंचायत अधिकारी बरवाला को निर्देश दिए कि वह इन पोल्ट्री फार्मों की चेकिंग करके उसकी रिपोर्ट भेजें।
उपायुक्त ने पोल्ट्री फार्म एसोसिएशन के प्रतिनिधियों को हिदायत दी और कहा कि वह इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए सरपंचों के साथ आपसी तालमेल बना कर कार्य करें। उन्होंने कहा कि जो पोल्ट्री फार्मर अपने परिसर में सरकार की हिदायतों की पालना नहीं कर रहे हैं, उनकी सूची पशुपालन विभाग व प्रदूषण नियंत्रण विभाग को बीडीपीओ के माध्यम से उपलब्ध करवाना सुनिश्चित करें। जिससे उनके खिलाफ पर्यावरण मंत्रालय के नियमों के अनुसार कार्रवाई अमल में लाई जा सके। उन्होंने कहा कि 15 दिन के बाद फिर एक समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन दुकानों से वह फीड में मिलाने वाली दवा खरीदते हैं, उनकी सूची उपलब्ध करवाएं जिससे उनकी गुणवत्ता को टेस्ट करवाया जा सके।
इस बैठक में पोल्ट्री फार्मर एसोसिएशन के प्रधान दर्शन सिंह ने कहा कि जिले में 120 पोल्ट्री फार्म है जिसमें से 90 पोल्ट्री फार्म कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि यह संभव है कि कुछ पोल्ट्री फार्म जारी की गई गाइड लाइन का पालन करने में कोताही बरत रहे हैं। एसोसिएशन की बैठक आयोजित कर उन पोल्ट्री फार्म के साथ तालमेल कर उन्हें इनकी पालना करने के लिए सचेत करेंगे और अवहेलना करने वालों की सूची जिला प्रशासन को मुहैया करवाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि सरपंचों के साथ तालमेल कर साल में दो बार मई जून और सितंबर अक्तूबर मास में खाद निकालने के लिए समय निर्धारित किया है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पक्षियों की फीड में सैरामाईजिन मेडिसन मिक्स किया जाता है, लेकिन उसकी क्वालिटी ठीक नहीं है। इसलिए जिन दवाई की दुकानों से यह दवा खरीदी जाती है उनकी चेकिंग प्रशासन करवाएं।
प्रशासन कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों से मक्खी पैदा होने की समस्या से स्थायी समाधान के लिए सर्वे करवाएं। इस बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त हेमा शर्मा, मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी नम्रता सिंह, नगराधीश ममता शर्मा, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी एमएल गर्ग, तहसीलदार पंचकूला राजेश पुनिया सहित खंड बरवाला व रायपुररानी के सरपंच व पोल्ट्री फार्म ऐसोसिएशन के प्रतिनिधि भी शामिल थे।