शताब्दी और वंदे भारत एक्सप्रेस में कुछ प्रमुख अंतर
- शताब्दी की तुलना में 180 किलोमीटर प्रतिघंटे की गति से दौड़ने में सक्षम
- वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रियों को मिलेगी ऑनबोर्ड वाईफाई की सुविधा
- शताब्दी के कोचों की लाइफ 25 साल, वंदे भारत एक्सप्रेस की 35 साल
- शताब्दी की तुलना में वंदे भारत एक्सप्रेस के दरवाजे पूरी तरह से ऑटोमेटिक हैं
- वंदे भारत एक्सप्रेस में समस्या आएगी तो लोको पायलट सूचना दे पाएगा शताब्दी में ऐसा नहीं
- वंदे भारत एक्सप्रेस इंजन रहित ट्रेन है जबकि शताब्दी में इंजन लगा हुआ है।
- वंदे भारत एक्सप्रेस में जीपीएस आधारित उन्नत प्रणाली की सुविधा है, शताब्दी में नहीं है
- शताब्दी की अपेक्षा वंदे भारत एक्सप्रेस में दिव्यांगों के अनुकूल स्थान उपलब्ध है
वंदे भारत की कुछ विशेषताएं
- इसकी डिजाइनिंग ऐसे की गई है कि यात्री ड्राइवर के केबिन की झलक देख सकें
- ट्रेन की पैंट्री में भोजन और पेय पदार्थों को गर्म-ठंडा करने के लिए बेहतर गुणवत्ता के उपकरण भी दिए गए हैं
- ट्रेक के डिब्बों के बीच के गैप को पूरी तरह से सील किया गया है जो शोर को कम करने में मदद करेगा
- ट्रेन के कोच में टच कंट्रोल के साथ रीडिंग लाइट दी गई है
- कंप्यूटराइज्ड एयरोडायनामिक ड्राइवर का केबिन है
- ऑटो सेंसर टैप भी दिए गए हैं
मोहाली में वंदे भारत एक्सप्रेस के ठहराव की मांग
वंदे भारत ट्रेन का ठहराव मोहाली में न होने पर डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह बेदी ने सांसद मनीष तिवारी, मुख्यमंत्री भगवंत मान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि ट्रेन के रुकने से शहर में रह रहे सभी वर्गों के लोगों को इसकी सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस ट्रेन का स्टॉपेज श्री आनंदपुर साहिब के बाद सीधा चंडीगढ़ है। ऐसा करने से मोहाली आने-जाने वाले लोगों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। वहीं मोहाली स्थित हवाई अड्डे तक जाने के लिए भी हिमाचल से आने वाले लोगों के साथ ही शहर में रह रहे प्रवासियों को भी इस स्टेशन पर ट्रेन रुकने का बहुत लाभ मिलेगा। शहर में बड़े-बड़े उद्योग हैं। अगर यहां पर यह ट्रेन रुकती है तो इससे व्यापार और उद्योगों को भी गति मिलेगी। यह भी कहा कि बड़ी संख्या में मोहाली के बच्चे दिल्ली के साथ-साथ गुरुग्राम में भी काम कर रहे हैं। वे यहां अक्सर आते-जाते हैं, इसलिए अगर ट्रेन का मोहाली में ठहराव होता है तो उन्हें भी आने-जाने में सुविधा होगी।