1993 के दिल्ली बम धमाके के दोषी दविंदर पाल सिंह भुल्लर ने समय पूर्व रिहाई की मांग की है। भुल्लर की याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अमृतसर जेल अधीक्षक, दिल्ली के गृह सचिव व डीजीपी जेल को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
दविंदर पाल सिंह ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बताया कि उसे दिल्ली बम धमाके के मामले में दोषी करार देते हुए ट्रायल कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी। फांसी की सजा को चुनौती देते हुए उसने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने याची को राहत देते हुए उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। इसके बाद याची ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी लेकिन वहां से भी उसे कोई राहत नहीं मिली।
याची ने बताया कि वह पिछले 27 साल से जेल में है और दिल्ली जेल मैनुअल के अनुसार समयपूर्व रिहाई के लिए बिना किसी छूट के 14 वर्ष जेल में रहना अनिवार्य है और छूट के साथ 20 वर्ष जेल में रहना जरूरी है। याची ने कहा कि वह तो इस तय अवधि से कहीं अधिक समय से जेल में है लेकिन उसे रिहा नहीं किया जा रहा है। इसके साथ ही उसने दया याचिका दाखिल की थी लेकिन इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। याची ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से अपील की है कि उसे हिरासत से छुड़ाने के लिए उचित आदेश जारी करें क्योंकि वह नियमों के तहत समय पूर्व रिहाई का हकदार है।
भुल्लर को वर्ष 1993 में दिल्ली में हुए बम धमाके के लिए वर्ष 2011 में मौत की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद 2014 में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में देरी, स्वास्थ्य कारणों के चलते, सिख संगठनों व एसजीपीसी के प्रयासों के बाद भुल्लर की फांसी को उम्रकैद में बदल दिया था। भुल्लर पहले तिहाड़ जेल में बंद था लेकिन स्वास्थ्य कारणों से एक विशेष व्यवस्था के तहत उसे 2015 में ही पंजाब की अमृतसर जेल में भेज दिया गया था।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 29 सितंबर, 2019 को दिल्ली के मुख्य सचिव को लिखे पत्र में भुल्लर सहित आजीवन कारावास का सामना कर रहे आठ सिख कैदियों को गुरु नानक देव की 550वीं जयंती के उपलक्ष्य में विशेष छूट देने के अपने फैसले की जानकारी दी थी। केंद्र ने दिल्ली के मुख्य सचिव को भुल्लर की रिहाई के लिए सभी आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया था लेकिन दिल्ली सरकार के सजा समीक्षा बोर्ड ने तिहाड़ जेल से दविंदर पाल सिंह भुल्लर की समयपूर्व रिहाई पर कोई निर्णय नहीं लिया। जिसके चलते उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर समय पूर्व रिहाई की गुहार लगाई है।