चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने आरटीई अधिनियम में बड़ा संशोधन किया है। पात्र बच्चों को दाखिला न देने पर निजी स्कूलों की मान्यता अब जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी (डीईईओ) ही रद्द कर सकेंगे। निदेशक मौलिक शिक्षा से सिर्फ जांच रिपोर्ट व सिफारिशों का अनुमोदन कराना होगा। अभी मंडलायुक्त स्तर पर गठित समितियां भंग मानी जाएंगी। अभी तक मान्यता रद्द करने के लिए यही समितियां विचार-विमर्श कर निदेशक को अपनी सिफारिश भेजती थी। डीईईओ उसमें सदस्य रहते थे।
मंडलायुक्त की सिफारिश पर कार्रवाई में निदेशक को तीन महीने से अधिक का समय भी लग जाता था। कार्रवाई में देरी होने पर निजी स्कूलों की मनमानी जारी रहती थी। हरियाणा निशुल्क और बाल शिक्षा का अधिकार नियम-2011 में प्रदेश सरकार की ओर से किया गया संशोधन 11 मई 2022 से प्रदेश में लागू हो गया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. महावीर सिंह ने नए नियमों की अधिसूचना जारी कर दी है। इन नियमों को अब हरियाणा निशुल्क और बाल शिक्षा का अधिकार संशोधन नियम-2022 कहा जाएगा। ताजा संशोधन के बाद स्कूलों की मान्यता रद्द करने के लिए डीईईओ की अध्यक्षता में ही पांच सदस्यीय समिति गठित होगी। दो स्कूल शिक्षक, पंचायत प्रतिनिधि व सामाजिक कार्यकर्ता शामिल होंगे। इसके साथ ही अगर निजी स्कूलों में सीटों से अधिक आवेदन आते हैं तो ड्रॉ के माध्यम से दाखिले होंगे। आरटीई के तहत निजी स्कूलों में एलकेजी, यूकेजी व पहली कक्षा में गरीब बच्चों को कुल में से 25 फीसदी सीटों पर दाखिले का प्रावधान है।
नए सत्र से शुरू होगा मान्यता रद्द करने का फैसला
डॉ. महावीर सिंह की अधिसूचना के अनुसार मान्यता रद्द करने से पहले निजी स्कूल को दो बार अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा। मान्यता रद्द करने का फैसला अगले सत्र से लागू होगा। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों का दाखिला आसपास के स्कूलों में कराया जाएगा। निदेशक भी शिकायत आने या स्वत संज्ञान लेकर निजी स्कूल की एनओसी रद्द कर सकते हैं। नियमों के उल्लंघन पर निदेशक सीधे स्कूल की प्रबंध समिति या प्रधानाचार्य को नोटिस भेजकर एनओसी या मान्यता वापस ले सकेंगे। साथ ही दो लाख रुपये तक जुर्माना लगाने का भी अधिकार रहेगा।
ये रहेगी मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया
डीईईओ अभिभावकों या किसी और के निजी स्कूल के खिलाफ शिकायत करने, स्वत संज्ञान पर नियम-12 के तहत मान्यता वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करेंगे।
निजी स्कूल का मान्यता की शर्तों का एक या अधिक बार उल्लंघन किया होना जरूरी है।
कार्रवाई के लिए स्कूल को नोटिस जारी कर एक माह के भीतर स्पष्टीकरण लेना।
स्पष्टीकरण से संतुष्ट न होने पर पांच सदस्यों की समिति स्कूल का निरीक्षण कर अपनी जांच रिपोर्ट देगी जिसमें मान्यता जारी रखने या वापस लेने की सिफारिश होना जरूरी।
समिति की रिपोर्ट व सिफारिशों को निदेशक मौलिक शिक्षा से अनुमोदित कराकर डीईईओ मान्यता वापस लेने के आदेश जारी करेंगे। एक लाख रुपये तक जुर्माना भी लगा सकते हैं।