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कैनल हाउस: अधिकारियों की मिली-भगत से हो रही धांधली

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पंचकूला। गांव सुखदर्शनपुर में करोड़ों की लागत से बन रहे कैनल हाउस के निर्माण में पीली ईंट, गोल बजरी और मिलावटी रेत लगाने के मामले में अधिकारियों की चुप्पी चर्चाओं का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि एससी विजय गोयल और एक्सईएन अंकिल लोहान के आदेश के बाद भी ठेकेदार द्वारा पीली ईंटों को नहीं हटाना बड़ी धांधली और मिलीभगत की तरफ इशारा करता है। अमर उजाला में प्रकाशित खबरों पर उपायुक्त मुकेश कुमार आहूजा ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने शनिवार को नगर निगम को पत्र लिखकर जवाब मांगा है। इसके लिए उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र लिखने का आदेश दिया है। उपायुक्त का कहना है कि वे समझ नहीं पा रहे हैं कि जब पूरा प्रकरण निगम आयुक्त, एससी और एक्सईएन के संज्ञान में है, तो इसके बाद भी वे हस्तक्षेप क्यों नहीं कर रहे हैं।
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जेई अधिकारियों की आंखों में झोंक रहा धूल
सुखदर्शनपुर में कैनल हाउस निर्माण कार्य पर नजर रखने के लिए निगम द्वारा तैनात किया गया जेई वरिष्ठ अधिकारियों को लगातार गुमराह कर रहा है। वह अधिकारियों के सामने ठेकेदार की कमियों को आने ही नहीं देता है। जैसे ही नगर निगम से कोई अधिकारी जांच के लिए रवाना होता है इसकी सूचना ठेकेदार और कारिंदों को पहले ही दे दी जाती है, जिसके चलते वह मिलावटी सामान को इधर-उधर कर देते हैं। इसके बाद जैसे ही अधिकारियों का काफिला मौके से रवाना होता है कार्य पुराने ढर्रे पर शुरू हो जाता है।
निगम अधिकारियों से जनता के सवाल
पंचकूला विकास मंच के राकेश अग्रवाल ने निगम अधिकारियों से इस मामले में सवाल किया है कि वह कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे तो निगम घोटाले का अड्डा बन जाएगा। सामाजिक कार्यकर्ता सीमा भारद्वाज ने सवाल किया है कि क्या निगम अधिकारियों को किसी मंत्री का खौफ सता रहा है, जिसके चलते वह आंखें मूंदे हैं। कांग्रेसी नेता संदीप सोही ने ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर लगे सवालिया निशान की जांच करने की मांग की है।
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निकाय मंत्री के पास पहुंचा धांधली का मुद्दा
सुखदर्शनपुर कैनल हाउस निर्माण कार्य में धांधली का मुद्दा शनिवार को स्थानीय निकाय मंत्री अनिल विज के पास भी पहुंच गया है। विज का कहना है कि जैसे ही उन्हें इस मामले की लिखित शिकायत मिलेगी वह जांच के आदेश जारी करेंगे। उन्होंने कहा कि इस मामले पर उनकी पैनी नजर है। वह देख रहे हैं कि निगम और प्रशासनिक अधिकारी क्या कार्रवाई कर रहे हैं।
यह हैं कुछ सवाल
मामला सामने आने के बाद भी निगम के अधिकारी चुप क्यों हैं। वह सब कुछ जानकर भी अनजान क्यों बने बैठे हैं। ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत क्यों नहीं जुटा पा रहे हैं। क्या निगम अधिकारियों पर किसी नेता या फिर मंत्री का दबाव है? यह सवाल शहरवासी प्रशासनिक अधिकारियों से पूछ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारियों की चुप्पी से स्पष्ट है कि ठेकेदार निर्माण कार्य में धांधली विभागीय अधिकारियों की मिली-भगत से कर रहा है। क्या ठेकेदार की पहुंच ऊपर तक है। इस कारण भी नगर निगम के अधिकारी कार्रवाई करने में दबाव महसूस कर रहे हैं।
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