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दंपती का आपस में बात तक न करना दोनों के प्रति क्रूरता, जीवनसाथी तलाक का हकदार : हाईकोर्ट

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चंडीगढ़। दंपती का आपस में बात न करना और झूठा केस दर्ज करना जीवनसाथी के प्रति क्रूरता है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए पत्नी द्वारा तलाक के फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।
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याचिका दाखिल करते हुए करनाल निवासी महिला ने बताया कि उसका विवाह 1992 में पटियाला में हुआ था। विवाह से उसके चार बच्चे हुए थे। उसके पति ने उसके खिलाफ तलाक का केस कुरुक्षेत्र की फैमिली कोर्ट में दाखिल किया था। फैमिली कोर्ट ने पाया कि याची ने अपनी पति के प्रति क्रूर रवैया अपनाया और इस आधार पर तलाक का आदेश जारी कर दिया। पति ने तलाक की याचिका में कहा था कि शादी के बाद से ही उसकी पत्नी का रवैया उसके प्रति ठीक नहीं था। 2011 में हालात ऐसे हो गए कि पत्नी ने पति पर घरेलू हिंसा का केस दाखिल कर दिया। इस केस में पति बरी हो गया। इसकेे बाद पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई, जिसमें पति बरी हो गया। इसके बाद पत्नी ने पति को 4 बच्चों समेत घर से निकाल दिया। तब से पति कुरुक्षेत्र में एक मकान किराए पर लेकर रह रहा है। इसके बाद बेटी की शादी में शामिल होने के लिए पत्नी से अनुरोध किया गया लेकिन पत्नी शामिल नहीं हुई।
इसके साथ ही पत्नी ने पति की कृषि भूमि पर भी कब्जा करने का प्रयास किया। फैमिली कोर्ट ने अपने फैसले में झूठी शिकायत और झूठी एफआईआर दर्ज करवाने को पत्नी की पति के प्रति क्रूरता माना। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि पति-पत्नी एक साथ रह रहे हैं और आपस में बात नहीं करते तो यह एक दूसरे के प्रति क्रूरता है। पत्नी 2012 से पति से अलग रह रही है और सहमति से तलाक के लिए तैयार नहीं है ऐसे में वह कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर पति का जीवन नर्क बना रही है। पत्नी ने बार बार झूठी शिकायतें दीं जो पति के प्रति शारीरिक और मानसिक क्रूरता है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने तलाक को चुनौती देने वाली पत्नी की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया और कुरुक्षेत्र की फैमिली कोर्ट के फैसले पर मुहर लगा दी।
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