वेंडरों को वेंडिंग जोन में शिफ्ट किए हुए सोमवार को एक माह पूरा हो गया है, लेकिन वेंडिंग जोन में वेंडरों को मूलभूत सुविधाओं के लिए आज भी परेशान होना पड़ रहा है। वेंडिंग जोन में पीने के पानी की सुविधा है न शौचालयों की। पार्किंग इतनी छोटी कि सड़क पर गाड़ी खड़ी करनी पड़ रही है। कई लोगों की गाड़ी ट्रैफिक पुलिस ले गई। धूप, सर्दी और बारिश की मार झेल रहे वेंडरों में काफी आक्रोश है।
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छह दिसंबर को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश पर नगर निगम ने रजिस्टर्ड वेंडरों को वेंडिंग जोन में शिफ्ट किया गया था, वहीं, बिना रजिस्ट्रेशन वाले वेंडरों को मार्केट से हटाया गया था। इसके अलावा अतिक्रमण को भी जेसीबी से हटवाया गया था। पुलिस और प्रशासन की मदद से निगम का अभियान काफी हद तक सफल भी रहा। इस व्यवस्था को एक माह बीत गया है। वेंडिंग जोन की सुध लेने वाला कोई नहीं है। सेक्टर-15 में शहर का सबसे बड़ा वेंडिंग जोन है। यहां 936 वेंडिंग साइट में से 783 पर वेंडर बैठ गए हैं।
निगम ने कुछ दिन तो मोबाइल टॉयलेट और पानी की टंकी रखवाई लेकिन अब मोबाइल टॉयलेट गायब हैं। वहीं, महीने भर से पानी की टंकी खाली है। सेक्टर-15 में ही वाटर वर्क्स है, लेकिन यहां पानी लाने वाला कोई नहीं हैं। वहीं वेंडरों की साइटों पर ही गाड़ियां खड़ी की जा रही हैं। ऐसे में वेंडर परेशान हैं, उनका कहना है कि तमाम आश्वासन देकर उन्हें यहां लाया गया था लेकिन यहां एक टॉयलेट के बाहर लंबी लाइन लगाकर लोग खड़े रहते हैं। मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं।
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साइटों की मार्किंग गायब, रोज होते हैं झगड़े
वेंडरों ने बताया कि निगम सेक्टर 15 के वेंडिंग जोन को मॉडल बनाने की बातें करता है। असल में एक ही टॉयलेट के बाहर लंबी कतारें देखकर समझ आ जाएगा कि वेंडिंग जोन का क्या हाल है। साइटों की मार्किंग पूरी तरह से गायब हो चुकी है। जगह के लिए रोज झगड़े होते हैं। फोन करने पर पुलिस तक नहीं आती। ऐसा लगता है जैसे कोर्ट को दिखाने के लिए निगम, प्रशासन और पुलिस ने खानापूर्ति की और वेंडरों को उनके हाल पर छोड़ दिया है।
4977 पंजीकृत वेंडरों में से 2914 ही बैठ रहे
निगम के पास कुल 4977 पंजीकृत वेंडर थे, जिनमें से अब तक मात्र 2914 ने ही वेंडर आवंटित स्थलों पर बैठ रहे हैं। सेक्टर-53 में 514 में से मात्र 14 और मलोया कालोनी में 36 में से मात्र 14 ने ही आवंटन पत्र लिया है। मिल्क कालोनी धनास में तो 56 में से एक भी वेंडर ने अपनी साइट का आवंटन पत्र नहीं लिया है। सेक्टर 52 में 64 में से 12, आईटी पार्क में 566 में से 366 वेंडरों ने आवंटन पत्र लिए हैं। वहीं कई वेंडर आवंटन पत्र लेकर भी अपनी निर्धारित जगह पर नहीं बैठ रहे। सेक्टर 22 में 89 में से 86 वेंडर और सेक्टर 19 में 31 में से 28 वेंडर शिफ्ट हो गए हैं।
योजनाएं बड़ी हैं, धरातल पर कब होंगी पता नहीं
नगर निगम ने हाल ही में 14 वेंडिंग जोन को स्मार्ट बनाने के लिए चुना है। जहां 90 कर्मचारी तैनात होंगे। जो सफाई से लेकर सुरक्षा व ट्रैफिक व्यवस्था देखेंगे। 4 सीनियर सुपरविजन अधिकारी व 12 सुपरविजन अधिकारी तैनात होंगे। पूरी व्यवस्था पर निगम ने लगभग साढ़े पांच करोड़ के खर्च का एस्टीमेट बनाया है। इस बजट में इंजीनियरिंग विंग पांच करोड़ 31 लाख 56 हजार रुपये से टॉयलेट निर्माण, वाटर स्टैंड पोस्ट, टाइल्स लगाने का काम करेगा, साइन बोर्ड लगाने का काम करेगा, वहीं एमओएच विंग 2 करोड़ 44 लाख के बजट से आउटसोर्स पर सफाई कर्मचारी रखेगा। इसकेअलावा वेंडरों को छाता, टेबल, स्टूल देने की भी योजना है, लेकिन इन योजनाओं का लाभ कब तक वेंडरों को मिलेगा पता नहीं।
सेक्टर 15 वेंडिंग जोन को मॉडल बनाने के लिए निगम वेंडरों को ट्रेड के अनुसार बैठाने की बात कह रहा है। वर्तमान में श्रृंगार से संबंधित 169, फास्ट फूड की 134, जूस की 56, बैग, चश्मा, पर्स की 26, स्टेशनरी की 36, मैकेनिक की 17, मोबाइल एसेसरीज व खिलौनों की 44, सब्जी व मेवा की 60, कपड़ों की 329, फुटवियर की 61 वेंडिंग साइट हैं। सभी को एक साथ बैठाया गया है। इतनी संख्या में लोगों को कोई सुविधा नहीं मिल रही है।
धीमी पड़ी कार्रवाई, बरामदों में लग रहा सामान
इधर, इंफोर्समेंट विंग की टीम भी धीमी पड़ गई है। मार्केट के बरामदों में दुकानदार खूब सामान लग रहे हैं। सेक्टर 19 सदर मार्केट में अभी भी दुकानदार खूब सामान लगा रहे हैं। हाल ही में कुछ दिन पूर्व सब इंस्पेक्टर रतन ने दूसरे के स्थान पर बैठे पांच लोगों को पकड़ा था। वहीं मनीमाजरा और इंडस्ट्रियल एरिया में भी वेंडर कई स्थानों पर बैठे दिख रहे हैं।
दो हिस्सों में बंटी जिम्मेदारी, 40 प्रतिशत बढ़ गई कमाई
वेंडरों को वेंडिंग जोन में शिफ्ट करने के बाद कमिश्नर केकेयादव ने इंस्पेक्टर सुनील दत्त और डीपी सिंह को दो अलग-अलग हिस्सों क जिम्मेदारी सौंपी है। इसका असर भी देखने को मिल रहा है। नवंबर माह में नगर निगम को इनफोर्समेंट विंग ने 65 लाख 80 हजार 75 रुपए का रेवेन्यू मिला था। वहीं दिसंबर माह में नई व्यवस्था के बाद 98 लाख 91 हजार रुपये का रेवेन्यू मिला है। वहीं इस माह सब इंस्पेक्टर मंगल सिंह ने सबसे ज्यादा 229 चालान काटे। सबसे कम चालान अवतार गोरिया के सबसे कम 55 चालान रहे। वहीं सब इंस्पेक्टर भूपेंदर कौर ने 107 चालान काटकर एक लाख 57 हजार रुपये का सबसे ज्यादा रेवेन्यू जुटाया है।
वेंडिंग जोन में सुविधाओं के लिए टेंडर हो चुके हैं। सभी काम जारी हैं। दो माह में सभी मूलभूत सुविधाएं वेंडिंग जोन में होंगी। निगम इसके लिए लगा हुआ है।
- अनिल गर्ग, एडीशनल कमिश्नर