पंचकूला। राजीव कालोनी, सेक्टर-17 की सड़क से कोई वीआईपी काफिला नहीं गुजरता। शहरवासी भी हाउसिंग बोर्ड लाइट प्वाइंट की सड़क या फिर अन्य मार्गों का इस्तेमाल करते हैं। यहां से तो केवल कालोनी वासियों ने ही गुजरना होता है। भले ही सड़क पर कूड़े के ढेर लगे हों या सड़क आधी रह गई हो, चिंता की क्या बात। राजीव कालोनी की सड़क को लेकर प्रशासन का रवैया कुछ ऐसा ही है।
यही कारण है कि सालों से इस सड़क की सूरत यही है। पूरा वर्ष यहां कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। कबाड़ से भरी गाड़ियां खड़ी रहती हैं। स्ट्रीट लाइट भी जगने लगे तो गनीमत है। इन अव्यवस्थाओं के चलते यदि आपराधिक तत्व कोई वारदात कर जाएं तो फिर राम भरोसे। दरअसल, राजीव कालोनी से चंडीगढ़ के मौलीजागरां चौक से पहले विजिलेंस ब्यूरो के ऑफिस तक सड़क दयनीय स्थिति में है। एमएलए एवं विधानसभा के अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता भी यदि किसी दिन इस सड़क गुजरें तो वह भी स्वयं को किसी पिछड़े क्षेत्र में होने जैसा महसूस करेंगे। ऐसा भी नहीं है कि इस सड़क का ऐसा हाला किन्हीं विशेष कारणों से हुआ हो, बल्कि सालों से इस मार्ग की यही दशा है।
सड़क का अधिकांश हिस्सा मिट्टी के ढेर, कबाड़ के ढेर और कबाड़ से भरी गाड़ियों से घिरा है। आवाजाही को महज इतना रास्ता बचा है कि वाहन को जिग-जेग कर ही निकाला जा सकता है। लेकिन यदि दूसरी दिशा से भी कोई वाहन चालक आ जाए तो निकलना तो दूर, भीषण सड़क हादसे का खतरा बना रहता है। पंचकूला से चंडीगढ़ जाने के लिए और चंडीगढ़ से पंचकूला में प्रवेश के लिए दोनों तरफ के वाहन चालकों को सड़क के बाईं तरफ के हिस्से का ही इस्तेमाल करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
प्रशासन और नगर निगम नहीं लेना चाहते सुध
पंचकूला प्रशासन और नगर निगम, दोनों ही राजीव कालोनी से चंडीगढ़ की तरफ जाती सड़क का सुधार करने से गुरेज करते रहे हैं। ऐसा नहीं है कि यह तस्वीर पहली बार प्रशासन और नगर निगम के अधिकारी देख रहे हों, बल्कि अमर उजाला इस सड़क से होते सौतेले व्यवहार को अधिकारियों के संज्ञान में पहले भी ला चुका है। बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारी इस मार्ग को शहर से कटा हुआ ही मानकर चल रहे हैं।
संकट में इसी रूट का करना पड़ा था इस्तेमाल
हैरत की बात यह है कि बीते समय, जब हाउसिंग बोर्ड लाइट प्वाइंट से पंचकूला के प्रवेश द्वार पर वेलकम गेट लगाया जा रहा था। उन दिनों में अधिकांश सेक्टर वासियों को राजीव कालोनी की सड़क से ही आवाजाही करनी पड़ी थी। समीपवर्ती वैकल्पिक मार्ग यही रह गया था। इस कारण उन दिनों में इसी मार्ग ने राहत प्रदान की थी। बावजूद इसके पंचकूला प्रशासन और नगर निगम की लापरवाही से यह सड़क इस कदर दयनीय स्थिति में है कि लोगों को नाक व मुंह पर हाथ रखकर यहां से गुजरना पड़ता है।
पास से गुजर रहा है नाला
राजीव कालोनी की सड़क के समीप से एक गंदा नाला भी सटा है। जो एमडीसी, सकेतड़ी से राजीव कालोनी से होकर जीरकपुर से आगे जाता है। कबाड़ी इस नाले की आड़ में कूड़े-करकट से भरी बोरियां भी फुटपाथ और सड़क पर रखते हैं। लेकिन पंचकूला प्रशासन इस स्ट्रीट को कभी कबाड़ियों के कब्जे से मुक्त ही नहीं करवा पाया।