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CAG Report: पंजाब में कॉलेज 14 फीसदी बढ़े, दाखिले 28 फीसदी घटे, शिक्षकों के 54 फीसदी तक पद खाली

Tue, 25 Oct 2022 11:14 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

कैग की रिपोर्ट में कॉलेजों की बढ़ती संख्या की सराहना करते हुए यह सवाल भी उठाया गया है कि कॉलेजों का विस्तार अनियमित है। किसी इलाके में कई कॉलेज खुल गए हैं जबकि कुछ इलाकों में एक भी कॉलेज नहीं है।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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पंजाब में बीते 10 साल के दौरान कॉलेजों की संख्या 14 फीसदी इजाफे के साथ 1111 तक पहुंच गई लेकिन इसी दौरान प्रदेश के कॉलेजों में दाखिला लेने वालों की संख्या में आश्चर्यजनक तरीके से 28 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है। यह खुलासा भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (कैग) ने सूबे के उच्चशिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली संबंधी अपनी ताजा ऑडिट रिपोर्ट में किया है। कैग ने यह भी पाया है कि प्रदेश के कॉलेजों में टीचरों के 27-54 फीसदी तक पद लंबे समय से खाली हैं, जिन्हें भरने की तरफ विभाग कोई गंभीर कदम नहीं उठा रहा।

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रिपोर्ट में कॉलेजों की बढ़ती संख्या की सराहना करते हुए यह सवाल भी उठाया गया है कि कॉलेजों का विस्तार अनियमित है। किसी इलाके में कई कॉलेज खुल गए हैं जबकि कुछ इलाकों में एक भी कॉलेज नहीं है। हालांकि प्रदेश में प्रति एक लाख की आबादी पर 29-35 कॉलेज हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सूबे के 33 उपमंडलों में 17 सरकारी कॉलेज हैं लेकिन 10 उपमंडल ऐसे हैं जहां एक भी कॉलेज नहीं है। सूबे में 2010-11 में जहां कॉलेजों की कुल संख्या 973 थी, वह 2019-20 में बढ़कर 1111 हो गई है। इस तरह कॉलेजों की संख्या में 14.18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
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कैग ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है कि राज्य में कॉलेज खोलने के लिए जियोग्राफिकल मैपिंग का सहारा लिया जाए ताकि पूरे प्रदेश में समान रूप से कॉलेज की पढ़ाई की व्यवस्था उपलब्ध हो सके। कैग ने प्रत्येक उपमंडल में कम से कम एक कॉलेज खोलने की सिफारिश की है। इसके साथ ही कैग ने दाखिले बढ़ाने के लिए उपाय खोजने की भी सिफारिश की है। इसके तहत विश्वविद्यालयों में हॉस्टलों की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। ऑडिट में कैग ने यह भी पाया है कि प्रदेश के कॉलेजों में विद्यार्थियों के दाखिले के रुझान में भारी गिरावट हो रही है। वर्ष 2010-11 से 2019-20 तक कॉलेजों में दाखिलों में 28 फीसदी की कमी आई है।

यूनिवर्सिटीज का किया ऑडिट
कैग ने मार्च से अगस्त 2021 तक पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला, जीएनडीयू अमृतसर और राजीव गांधी यूनिवर्सिटी का भी ऑडिट किया। इसमें कैग ने पाया कि 2015 से 2020 तक स्टेट स्कॉलरशिप स्कीम में 632 विद्यार्थियों पर 7 लाख रुपये खर्च किए गए, जबकि इसी अवधि में पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम में 3,36,624 विद्यार्थियों को लाभ दिया गया, जिस पर 702 करोड़ खर्च हुए।

नैक की रैंकिंग में भी पिछड़े पंजाब के कॉलेज
पंजाब के सिर्फ तीन कॉलेज ही राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद (एनएएसी) रैंकिंग में शामिल हैं। कैग ने इसका मुख्य कारण, साधारण कौशल में कमी, टीचरों की कमी, प्रशिक्षण की कमी, इंडस्ट्री के साथ सरकारी कॉलेजों का कमजोर तालमेल, कॉलेजों में प्रबंधन सूचना पद्धति के अभाव को मानते हुए रिपोर्ट में लिखा है कि कॉलेजों में निगरानी और मूल्यांकन, जिसके तहत शिक्षा में बराबरी, गुणवत्ता और प्रशासन प्रबंधन संबंधी कमियों पर नियंत्रण किया जाना है, की कमी भी एक बड़ा कारण है। कैग ने सिफारिश की है कि पाठ्यक्रम का निर्धारण एनएएसी द्वारा तय मानदंड के अनुसार होना चाहिए और कक्षाओं में 20 विद्यार्थियों पर एक अध्यापक का अनुपात होना चाहिए। फिलहाल पंजाब के कॉलेजों में यह अनुपात 49 विद्यार्थियों पर एक अध्यापक का है।

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