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डिस्कॉम, ऊर्जा महकमे के पेच कसेंगे सीएम

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चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने वर्ष 2019 में लांच सीएम सौर ऊर्जा योजना को लेकर चला आ रहा गतिरोध खत्म करने के लिए खुद कमान संभाल ली है। अपनी महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर साकार करने के लिए मुख्यमंत्री ने शनिवार को उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। इसमें ऊर्जा मंत्री रणजीत सिंह चौटाला, ऊर्जा महकमे, हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम और डिस्कॉम के उच्च अधिकारी निर्णय लेंगे। योजना को सिरे चढ़ाने के लिए पहले भी बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन डिस्कॉम अपनी शंकाओं का निवारण न होने के कारण पुराने रुख पर कायम हैं। डिस्कॉम तभी हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम से सौर ऊर्जा खरीद को अनुमति देंगे, जब उनकी सबसे बड़ी शंका पावर ग्रिड के अस्थिर न होने व निगमों के दोबारा घाटे में न जाने की शंका दूर होगी। इन शंकाओं के चलते ही डिस्कॉम और ऊर्जा महकमे में सीएम सौर ऊर्जा योजना को लेकर गतिरोध बना हुआ है।
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ऊर्जा महकमे के उच्च अधिकारी योजना को लेकर चल रही फाइल में डिस्कॉम केरवैये को नकारात्मक करार दे चुके हैं। योजना में दो हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर चुके निवेशकों की निगाहें मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठक पर टिकी हुई हैं। चूंकि, योजना के भविष्य को लेकर सीएम ने ही निर्णय लेना है। निवेशक इस लिए सहमे हुए हैं, क्योंकि यह योजना 2018 में एक बार रद भी हो चुकी है, इसे 2019 में कैबिनेट मंजूरी के बाद लागू किया गया था। पुरानी योजना में निवेशकों को कैप्टिव व ग्रुप कैप्टिव सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए दी गई कई रियायतें वापस ले ली गई थीं। प्रदेश में स्थिति यह है कि इस योजना के तहत अब तक मात्र 38 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन ही हो रहा है, जबकि हरियाणा को 2022 तक 2500 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन लक्ष्य पूरा करना है। निवेशकों ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल और ऊर्जा मंत्री रणजीत सिंह से मांग की है कि शनिवार को होने वाली बैठक में योजना को लेकर चला आ रहा गतिरोध खत्म कराएं। ताकि निवेशक काम शुरू कर सकें। बैंकों से करोड़ों रुपये का कर्ज लिया हुआ है और किस्त नियमित रूप से न चुका पाने पर नोटिस आ रहे हैं।
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