चंडीगढ़। मंगलवार को नगर निगमों के भाजपा से संबंधित मेयर (महापौर) मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मिले। मुख्यमंत्री आवास पर दो घंटे तक चली बैठक में सीएम ने एक-एक करके सभी निगमों की फीडबैक ली। इस दौरान स्थानीय निकायों में वित्तीय और कार्रवाई के अधिकार नहीं मिलने का मुद्दा भी उठा। मेयरों को आश्वासन देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जल्द ही इस मामले का निपटारा किया जाएगा।
हरियाणा में मेयर लंबे समय से वित्तीय पावर देने की मांग कर रहे हैं। प्रदेश में मेयर के पास कोई वित्तीय अधिकार नहीं है। नगर निगम आयुक्तों के पास तमाम वित्तीय अधिकार हैं। नगर परिषद और नगर पालिका के चेयरमैन के पास तमाम वित्तीय पावर है, लेकिन मेयर के पास नहीं है। प्रदेश सरकार ने मेयरों को निगम आयुक्तों की एसीआर (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) लिखने की पावर जरूर दे रखी है। लेकिन इसे भी महानिदेशक, अतिरिक्त मुख्य सचिव और मंत्री के बाद मुख्यमंत्री चाहें तो बदल सकते हैं। हालांकि, प्रदेश सरकार मेयर व पार्षदों को वित्तीय पावर देने की घोषणा भी कर चुकी है, लेकिन अभी तक इसको लेकर कोई पत्र जारी नहीं हो पाया है। फिलहाल, मेयर को सिर्फ विकास कार्यों के प्रस्ताव पास करने के लिए हाउस की मीटिंग बुलाने का अधिकार है। इसके अलावा, वेतनमान भी कम है।
इस मौके पर पंचकूला के मेयर कुलभूषण गोयल, पानीपत की अवनीत कौर, रोहतक के मनमोहन गोयल, करनाल की मेयर रेणु बाला गुप्ता समेत यमुनानगर और हिसार के मेयर मौजूद रहे। वहीं, नगर निकाय के एसीएस अरूण गुप्ता, निदेशक डीके बहरा समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
निकाय चुनाव पर भी किया मंथन
मुख्यमंत्री ने बैठक में आने वाले निकाय चुनाव को लेकर भी मेयरों की राय जानी। अलग अलग शहरों के मुद्दे भी पूछे गए और किस प्रकार से शहरों में भाजपा और मजबूत हो सकती है, इस पर चर्चा की गई। साथ ही जमीनी स्तर आ रही दिक्कतों और समस्याओं के बारे में जानकारी हासिल की। किस प्रकार से निगमों का राजस्व बढ़ाया जा सकता है और निगम लोगों को और अधिक सेवाएं दे सकें, इसके लिए भी सुझाव मांगे गए।