रैंकिंग में चंडीगढ़ का पानी शिमला से भी खराब बताया गया है। शिमला को सातवीं रैंकिंग मिली है जबकि चंडीगढ़ आठवीं रैंकिंग पर है। वहीं देहरादून का पानी चंडीगढ़ से भी खराब बताया गया है। देहरादून को 18वीं रैंकिंग मिली है। अधिकारियों का कहना है कि विकिपीडिया पर भी देश में सबसे अच्छा पानी देने वाले शहरों की सूची में चंडीगढ़ नंबर एक पर है। ऐसे में रैंकिंग में कौन से मानक अपनाए गए हैं, इसकी जानकारी नहीं है।
डेढ़ करोड़ की लैबोरेटरी में होती है पानी की जांच
चीफ इंजीनियर ने बताया कि सेक्टर-39 में हाल ही में डेढ़ करोड़ रुपये से लैबोरेटरी को अपग्रेड किया है। पहले मैनुअल ही पानी को चेक किया जाता था, लेकिन अब कंप्यूटराइज्ड सिस्टम से पानी को पूरी तरह से चेक करने के बाद सप्लाई की जाती है। इस पानी को डब्ल्यूएचओ के मानक के अनुसार पीने योग्य बनाया जाता है। ऐसे में किसी भी तरह की पानी में अशुद्धि का सवाल ही नहीं उठता।
शहर में सप्लाई होता है 105 एमजी पानी
कजौली वाटर वर्क्स से पहले चार फेज में 55 एमजी पानी चंडीगढ़ सप्लाई होता था। वहीं 17 एमजी पानी ट्यूबवेल से सप्लाई होता था। पांचवें और छठे फेज से 35 एमजी पानी अतिरिक्त आने लगा। इसमें से 29 एमजी पानी चंडीगढ़ और शेष पानी पंचकूला व चंडी मंदिर के लिए सप्लाई होता है। इस तरह से चंडीगढ़ में कुल 105 एमजी पानी सप्लाई होता है। अधिकारियों का कहना है कि 11 लाख लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं कर सकते हम।
स्काडा सिस्टम से और बढ़ाएंगे पानी की शुद्धता
शहर के लोगों को शुद्ध पेयजल सप्लाई के लिए स्मार्ट सिटी पानी की पाइप लाइनों पर सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्वेजिशन (स्काडा सिस्टम) लगाएगा। इसके अंतर्गत पाइपों में अंदर तीन स्थानों पर डिसॉल्ड ऑक्सीजन सेंसर, क्लोरीन सेंसर और प्रेशर सेंसर लगाए जाएंगे। एक जहां से पानी छोड़ा जाता है, दूसरा बीच में और तीसरा जहां से पानी को अलग अलग क्षेत्र में छोड़ा जाना है। जिसकी मॉनीटरिंग स्मार्ट सिटी के ऑफिस से ही होगी।
यदि किन्हीं कारणों से गंदा पानी आता है या पानी से दुर्गंध आती है तो तत्काल उसकी जानकारी सिस्टम पर आ जाएगी। साथ ही किस स्थान से यह समस्या पैदा हो रही है, वहां की जानकारी भी आसानी से मिल सकेगी। वहीं इस सिस्टम से पानी प्रेशर से न आने की समस्या भी ऑफिस में बैठक कर्मचारियों को पता चल जाएगी।