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हादसे रोकने के लिए विकास मार्ग पर बनेंगे तीन नए चौक

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चंडीगढ़। तेज रफ्तार की वजह से होने वाले हादसों को रोकने के लिए प्रशासन शहर के तीन चौराहों पर चौक बनाने जा रहा है। इसके लिए प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग ने ड्राइंग तैयार कर ली है। तीनों चौक विकास मार्ग पर बनेंगे। प्रशासन के चीफ इंजीनियर सीबी ओझा ने बताया कि हादसे के खतरे को कम करने के लिए ही तीन नए चौक बनाए जा रहे हैं।
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सेक्टर-39 की मंडी से सेक्टर-48 की तरफ जाने वाले विकास मार्ग पर 9 मुख्य चौराहे हैं, जिनमें से 6 पर चौक बने हुए हैं, लेकिन तीन चौराहे लाल बत्तियों के सहारे चल रहे हैं। कई बार ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिनमें सामने आया है कि इस सड़क पर कुछ लोग बहुत तेज गाड़ी चलाते हैं और फिर संतुलन खोने की वजह से हादसे का शिकार हो जाते हैं। कई हादसों में चालक की जान भी जा चुकी है, इसलिए प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग ने फैसला किया है कि जिन तीन चौराहों पर सिर्फ लाल बत्तियां हैं, वहां भी चौक बनाए जाएंगे। हालांकि, चौक बनने के बाद भी वहां लाल बत्ती लगाई जाएगी।
सीबी ओझा ने बताया कि विकास मार्ग के तीन चौराहों पर चौक बनाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए ड्राइंग तैयार कर ली गई है और अनुमानित लागत तैयार हो रही है। ओझा ने बताया कि इन लाल बत्तियों से काफी तेजी से गाड़ियां गुजरती हैं, जिसकी वजह से हादसे का खतरा बना रहता है, लेकिन चौक बनने के बाद लोग दूर से गाड़ी की रफ्तार को धीमा कर लेते हैं। आने वाले कुछ महीनों में ये तीन चौक बनाए जा रहे हैं।
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अप्रैल में शुरू होगा पीयू-पीजीआई अंडरपास का काम
पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) व पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमआर) के बीच बनने वाले शहर के तीसरे अंडरपास का काम अप्रैल महीने में शुरू हो जाएगा। पहले के दोनों अंडरपास से यह ज्यादा चौड़ा होगा और इसमें पीजीआई आने वाले मरीजों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए एस्केलेटर और लिफ्ट भी होगी। प्रस्तावित अंडरपास में एस्केलेटर और लिफ्ट की वजह से ही इसे ज्यादा चौड़ा बनाया जा रहा है। पैदल पार करने के लिए लोगों को लगभग 40 मीटर की दूरी तय करनी होगी, जो कि 3 मीटर की ऊंचाई पर होगा। अंडरपास में 12 दुकानें होंगी व प्रत्येक का आकार 80 वर्ग फुट का होगा। 7.5 करोड़ रुपये की लागत से इस अंडरपास का निर्माण होगा। इसे छह महीने में पूरा होने की संभावना है। इस परियोजना को नवंबर 2019 में चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने सैद्धांतिक मंजूरी दी थी।
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