चंडीगढ़ में एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल जारी है।
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चंडीगढ़ में एनएचएम कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने को गलत ठहराते हुए स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग ने उनकी सेवा समाप्त करने का आदेश दिया है। उनका कहना है कि कोविड, डेंगू और मलेरिया के कारण स्वास्थ्य विभाग पर बेहद दबाव है। स्वास्थ्य निदेशक की ओर से हड़ताल न करने के आदेश की अवहेलना कर एनएचएम कर्मचारियों ने अनुशासनहीनता की है। इसलिए जो भी कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए हैं, उनकी सेवा समाप्त कर अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्रों में उनके प्रवेश पर रोक का आदेश दिया गया है।
वहीं, कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए ठेकेदार से नई तैनाती प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है। इसमें कोविड के दौरान रखे गए आउटसोर्स के उन कर्मचारियों को वरीयता देने को कहा गया है, जिनकी सेवा समाप्त की जा चुकी है। उन्होंने व्यवस्था संभालने के लिए मौजूदा कर्मचारियों से अतिरिक्त ड्यूटी कराने को कहा है। स्वास्थ्य सचिव का कहना है कि एनएचएम कर्मचारी वेतन तो डीसी रेट पर लेना चाहते हैं, लेकिन काम और अन्य शर्तों को अपने अनुसार लागू करवाना चाहते हैं। ऐसा नहीं हो सकता।
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वहीं डीसी रेट से वेतन भुगतान के नाम पर जबरदस्ती आउटसोर्स के मानकों को थोपे जाने के विरोध में एनएचएम कर्मचारी गुरुवार को भी हड़ताल पर रहे। जीएमएसएच-16 में एकत्र होकर कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। मामले पर प्रशासक के सलाहकार और स्वास्थ्य सचिव के बीच वार्ता भी हुई, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका।
एनएचएम कर्मचारियों ने बताया कि सलाहकार ने उनकी मांगों को सही ठहराते हुए स्वास्थ्य सचिव से वार्ता का निर्देश दिया, लेकिन स्वास्थ्य सचिव ने सुनवाई करने से साफ मना कर दिया। उनका कहना है कि अगर डीसी रेट पर वेतन चाहिए तो आउटसोर्स के मानकों का शत प्रतिशत पालन करना होगा। उन्होंने हमारी हड़ताल को गलत ठहराया। उन्होंने हड़तालरत कर्मचारियों की जगह नई भर्ती करने की भी बात कही। इससे कर्मचारियों में काफी रोष है। कर्मचारियों का कहना है कि कोविड के दौरान जान हथेली पर रखकर क्या इसी दिन के लिए ही ड्यूटी की थी। प्रशासन हमें ईमानदारी और मेहनत का उपहार ऐसे प्रताड़ित करके दे रहा है। कर्मचारियों ने शुक्रवार को भी हड़ताल जारी रखते हुए सचिवालय कूच करने का निर्णय लिया है।