चंडीगढ़। फर्जी चेक के जरिए नगर निगम के एमओएच विभाग के खाते से 28.51 लाख रुपये उड़ाने के मुख्य आरोपी कार्तिक्या को गुजरात से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की एक टीम उसे लेकर चंडीगढ़ पहुंच गई है जबकि दूसरी टीम अन्य आरोपियों की तलाश अभी गुजरात में ही कर रही है।
शातिरों ने निगम का फर्जी चेक लगाकर उस पर संयुक्त आयुक्त रोहित गुप्ता और मुख्य वित्त अधिकारी वीएस ठाकुर के हस्ताक्षर करके एमओएच के खाते से 28.51 लाख रुपये निकाले थे। इसके बाद शातिरों ने दो चेक लगाकर 98.51 लाख और 22.50 लाख रुपये निकालने का प्रयास किया। इसमें शातिर कामयाब नहीं हो सके। गोसेस के नाम पर खोले गए खाते में शातिर को पता था कि जानवरों के नाम पर ही रुपये निकाल सकते हैं इसलिए कार्तिक्या फिश प्लांट - वानी के नाम पर रुपये निकाल लिए थे। वहीं दो चेक किसी हुसैन मुतारिक शेख को जारी किए गए थे, जो बाद में पकड़े गए। निगम की शिकायत पर पुलिस ने डीएसपी सेंट्रल के नेतृत्व में दो टीमों को तत्काल गुजरात के लिए रवाना कर दिया था।
अकाउंटेंट का मोबाइल हैक कर शातिर ने फोन पर ली थी सहमति
निगम ने शिकायत में बताया है कि बैंक में निगम के एक अकाउंटेंट का नंबर दिया गया था। मामले में पता चला है कि 11 अक्तूबर को खाते से रुपये निकालने से तीन दिन पहले शातिरों ने अकाउंटेंट का मोबाइल हैक कर लिया था। इस कारण अकाउंटेंट ने उसी नंबर की दूसरी सिम बदलवा ली थी। इस दौरान शातिरों ने बैंक से सहमति जताकर रुपये निकाल लिए। दूसरी बार भी शातिरों ने उसी प्रक्रिया से रुपये निकालने का प्रयास किया, लेकिन बड़ी रकम देखकर बैंक कर्मचारियों ने निगम के सेक्शन ऑफिसर को फोन करके चेक के बारे में जानकारी ली। सेक्शन ऑफिसर ने मुख्य वित्त अधिकारी (सीईओ) से पूछ तो उन्होंने किसी भी चेक से रुपये निकालने की बात से इनकार कर दिया। इसके बाद इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
एक चेक अमरावती और दूसरा पुणे के बैंक में लगाया
जांच में पता चला है कि कार्तिक्या फिश प्लांट -वानी के नाम से लगाया गया चेक महाराष्ट्र के अमरावती के बैंक में लगाया गया था। लालच बढ़ने के बाद शातिरों ने 98.51 लाख और 22.50 लाख के दो चेक और लगाकर उसी प्रक्रिया से रुपये निकालने का प्रयास किया, लेकिन इस बार बैंक ने अधिकारियों से क्रॉस चेक कर लिया। जिसमें शातिर फंस गए।
बड़ा सवाल: हूबहू बैंक के चेक कैसे बने
बड़ा सवाल यह है कि बैंक के हूबहू चेक कैसे बने। वहीं चेक को क्लियर होने में कई पड़ाव पर चेक किया जाता है, लेकिन किसी भी पड़ाव पर नकली चेक पकड़े नहीं गए। बैंक के चेक की प्रिंटिंग से लेकर केमिकल चेकअप के दौरान भी नकली चेक पकड़ा नहीं जा सका।
कोट...
हमने बैंक को स्पष्ट कह दिया है कि एक सप्ताह के अंदर रुपये नहीं मिले तो अदालत की शरण में जाएंगे। हमारे स्तर पर कोई चूक नहीं हुई है। हमारे पास बैंक से जारी पूरे 10 चेक हैं। -आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम