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डेंगू से स्थिति गंभीर, रेमडेसिविर की तरह अब प्लेटलेट्स किट की कालाबाजारी शुरू

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चंडीगढ़। डेंगू के कारण ट्राइसिटी में सिंगल डोनर प्लेटलेट्स किट या बैग की भारी किल्लत हो गई है। स्थिति यह है कि परिजन अपने मरीज की जान बचाने के लिए इसकी मुंहमांगी कीमत चुका रहे हैं। इससे कालाबाजारी भी शुरू हो गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि 8 से 10 हजार के बीच मिलने वाला यह किट 12 से 15 हजार रुपये में धड़ल्ले से बेचा जा रहा है।
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इस संबंध में केमिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि कोरोना के दौरान जो स्थिति रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर थी, वही डेंगू के दौरान प्लेटलेट्स किट को लेकर हो गई है। पंचकूला के सरकारी अस्पताल से लेकर निजी ब्लड बैंक तक में यह कहीं भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मरीजों के परिजन किट खरीदने के लिए चंडीगढ़ और मोहाली के चक्कर काट रहे हैं।
पंचकूला के एक निजी ब्लड बैंक के संचालक शिव कपूर ने बताया कि उनके पास किट न होने पर उन्होंने मरीजों के परिजनों को चंडीगढ़ भेजा था, लेकिन चंडीगढ़ में भी किसी केमिस्ट शॉप पर किट उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं पंचकूला सिविल अस्पताल के उच्चाधिकारी भी अस्पताल में इस किट के उपलब्ध न होने की बात स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन इस बारे में कोई भी बयान देने से बच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कुल मिलाकर स्थिति भयानक होती जा रही है। ऐसे में जरूरी है कि क्षेत्रीय प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग डेंगू की जांच और इलाज के मानक तय करे।
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किट के चक्कर में परेशान होना ठीक नहीं
पीजीआई ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के प्रभारी प्रो. रतिराम शर्मा का कहना है कि डेंगू के कारण अचानक प्लेटलेट्स की मांग बढ़ने से यह स्थिति बनी है। हालांकि इस किट के लिए इतना परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि मरीज को होल ब्लड से मिलने वाला प्लेटलेट्स भी उतना ही फायदा पहुंचाता है, जितना सिंगल डोनर प्लेटलेट्स बैग से चढ़ाया जाने वाला प्लेटलेट। जबकि होल ब्लड वाल बैग महज 150 रुपये में उपलब्ध है। वहीं, सिंगल डोनर वाले बैग या किट के लिए मरीजों के परिजन 8 हजार से 10 हजार रुपये तक खर्च कर रहे हैं।
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पीजीआई होल ब्लड से प्लेटलेट्स बनाकर दे रहा मरीजों को
पीजीआई में भर्ती मरीजों के साथ ही अन्य अस्पतालों के जरूरतमंद मरीजों को होल ब्लड से प्लेटलेट्स बनाकर दिया जा रहा है। प्रो. शर्मा का कहना है कि गंभीर मरीजों पर दोनों ही प्रकार से बनाए गए प्लेटलेट्स का प्रभाव एक समान है। रक्तदान से मिलने वाले खून से ही प्लेटलेट्स अलग कर डेंगू व इसकी जरूरत वाले अन्य मरीजों को दिया जा रहा है। किट की डिमांड बढ़ने से बेवजह खौफ पैदा किया जा रहा है, जो ठीक नहीं है।
कोट
डेंगू के कारण स्थिति बेहद खराब हो गई है। कल तक जो कंपनियां प्लेटलेट्स किट पर ऑफर देती थीं, वो अब आपूर्ति भी ठीक से नहीं दे रही हैं। इससे अचानक मांग बढ़ने से कोविड के दौरान जिस तरह रेमडेसिविर की किल्लत हुई थी, वही स्थिति उत्पन्न हो गई है।
- नवदीप जिंदल, सदस्य, केमिस्ट एसोसिएशन
कोट
डेंगू के कारण लोगों को पैनिक कर ये स्थिति उत्पन्न की जा रही है। इसके मरीजों के लिए प्लेटलेट्स और किट के प्रयोग को लेकर स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर स्वास्थ्य विभाग को प्रोटोकॉल तय करना होगा।
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प्रो. रतिराम शर्मा, प्रभारी पीजीआई ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग
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